🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

व्यापक भारत–कनाडा मुक्त व्यापार समझौता “बिना शुल्क वाला व्यापार” होना चाहिए: कनाडाई पत्रकार टेरी माइल्यूस्की

प्रस्तावित सीईपीए वार्ताओं का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 18, 2026 23:31 IST

नई दिल्ली : वरिष्ठ कनाडाई पत्रकार टेरी माइल्यूस्की ने व्यापक भारत–कनाडा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) की आवश्यकता और लोगों से लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने पर जोर दिया है। उन्होंने बदलती वैश्विक भू-राजनीति के बीच द्विपक्षीय संबंधों की भावी दिशा पर बात करते हुए यह टिप्पणी की।

ANI को दिए एक साक्षात्कार में माइल्यूस्की ने कहा कि यदि कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भारत की संभावित यात्रा करते हैं तो उसका प्रमुख परिणाम एक व्यापक मुक्त व्यापार समझौता होना चाहिए, जिसमें भारत और कनाडा यह उदाहरण पेश करें कि ऐसा समझौता कैसा होना चाहिए। यह बिना शुल्क वाला व्यापार होना चाहिए।

एफटीए को सीमित व्यापारिक रियायतों से आगे ले जाने की आवश्यकता पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि हमें एक ऐसा व्यापक मुक्त व्यापार समझौता चाहिए जिसमें भारत और कनाडा मिसाल कायम करें। यह बिना शुल्क वाला व्यापार होना चाहिए। आखिर कोई शुल्क क्यों होना चाहिए?

माइल्यूस्की ने भारत–कनाडा संबंधों में हालिया सुधार को पूर्ण समाधान मानने के प्रति भी आगाह किया। उन्होंने कहा कि मेरे अनुसार भारत और कनाडा के बीच जिस मेल-मिलाप की बहुत चर्चा हो रही है, वह वास्तव में मौजूद नहीं है। यह दोनों सरकारों के लिए सुविधाजनक एक भ्रम है। जिन विवादों के कारण संबंधों में गिरावट आई थी, वे अब भी अनसुलझे हैं। उन्होंने उस विवाद को सुलझाने का फैसला नहीं किया है, जिसने संबंधों में तीव्र गिरावट को जन्म दिया था, जब ट्रूडो ने मोदी सरकार पर हत्या का आरोप लगाया था।

मालूम हो कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक तनाव 2023 में तब शुरू हुआ जब भारत ने कनाडा में खालिस्तानी अलगाववादी तत्वों के प्रति कथित नरमी पर चिंता जताई थी और उसी वर्ष तत्कालीन कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने आरोप लगाया था कि भारतीय एजेंट गुरुद्वारे के बाहर एनआईए द्वारा नामित आतंकवादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में शामिल थे।

वर्तमान स्थिति पर टिप्पणी करते हुए माइल्यूस्की ने कहा, “दोनों सरकारों ने इसे ऐसे ही छोड़ देने का फैसला किया है। वे पृष्ठभूमि में मौजूद इस अनिर्णीत और अनसुलझे विवाद के साथ ही आगे बढ़ने वाले हैं।”

संभावित कूटनीतिक संपर्क का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि काफी व्यापक रूप से यह रिपोर्ट है कि आने वाले कुछ महीनों में कार्नी भारत आ सकते हैं। यदि ऐसी यात्रा होती है तो वे चाहेंगे कि भारत एयर इंडिया 182 के पीड़ितों के लिए एक स्मारक बनाए। मेरे विचार में यह तब तक नहीं होना चाहिए, जब तक भारतीय सरकार स्वयं धन जुटाकर एयर इंडिया 182 के पीड़ितों के लिए स्मारक न बनाए। कनाडा में हमारे पास चार स्मारक हैं।

समाज स्तर पर गहरे जुड़ाव के महत्व को रेखांकित करते हुए माइल्यूस्की ने कहा कि भारत और कनाडा के बीच लोगों से लोगों के संपर्क बेहद फलदायी हैं। यह कनाडा के लिए अद्भुत है। संबंध अपराध की पूरी तरह गलत दिशा में फंस गए हैं। मैं लोगों से लोगों के बीच संबंधों की गुणवत्ता और शैली में बड़े सुधार को देखना चाहूंगा। दो शानदार लोगों, कनाडाइयों और भारतीयों का आपसी मेल-जोल।

माइल्यूस्की ने बदलते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य और कनाडा की विदेश नीति के रुख पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ट्रंप के परिदृश्य में आने के बाद से जो घटनाएं हुई हैं, उन्होंने हमें दो-तीन बार झकझोर दिया है।

यह बयान ऐसे समय आया है, जब कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा है कि ओटावा अपने वैश्विक व्यापार को विविध बनाने के लिए अगले दशक में अमेरिका से इतर निर्यात को दोगुना करेगा। कनाडा में भारत के उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने कहा है कि दो वर्षों से अधिक समय तक तनावपूर्ण कूटनीतिक संबंधों के बाद द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाने के लिए कार्नी आने वाले हफ्तों में भारत की यात्रा करेंगे।

13 जनवरी को सीबीसी के कार्यक्रम “पावर एंड पॉलिटिक्स” में पटनायक ने कहा कि कार्नी की यात्रा का उद्देश्य अमेरिका द्वारा लगाए गए उच्च शुल्कों के बीच कनाडा के व्यापारिक साझेदारों में विविधता लाना है। रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए ऊंचे शुल्कों का सामना भारत और कनाडा दोनों कर रहे हैं। भारत पर 50 प्रतिशत और कनाडा पर 35 प्रतिशत शुल्क।

कार्नी ने सोमवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में कहा, “बदलते वैश्विक व्यापार परिदृश्य में कनाडा की नई सरकार उन चीजों पर ध्यान केंद्रित कर रही है, जिन्हें हम नियंत्रित कर सकते हैं। हम अगले दशक में अमेरिका से इतर अपने निर्यात को दोगुना करेंगे ताकि कनाडाई व्यवसायों के लिए नए अवसर सुनिश्चित हों और कनाडाई श्रमिकों के लिए हजारों नई नौकरियां पैदा हों।”

पटनायक ने कहा कि भारत के 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किए जाने के बाद कार्नी की यात्रा की उम्मीद है और उन्होंने इस नए जुड़ाव को इस बात का संकेत बताया कि प्रणाली में भरोसा लौट आया है। पटनायक ने दोहराया कि भारत सरकार ने किसी भी प्रकार की संलिप्तता से इनकार किया है। मौजूदा नेतृत्व में कनाडा का दृष्टिकोण बदल रहा है। सीबीसी के हवाले से उन्होंने कहा, “एक नए प्रधानमंत्री हैं, जो कनाडा के व्यवहार के तरीके को बदल रहे हैं।”

कनाडा के प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान में कहा गया है कि पिछले वर्ष नवंबर में कार्नी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आमंत्रण को स्वीकार करते हुए 2026 की शुरुआत में भारत आने पर सहमति जताई थी।

अगस्त 2025 में उच्चायुक्तों की वापसी के बाद दोनों प्रधानमंत्रियों ने बढ़ती वाणिज्य दूतावास संबंधी मांगों को पूरा करने और लोगों से लोगों के संबंधों को मजबूत करने के लिए कूटनीतिक स्टाफ बढ़ाने पर सहमति जताई। उन्होंने आपसी ज्ञान हस्तांतरण को भी समर्थन देने पर सहमति व्यक्त की।

भारत और कनाडा ने दक्षिण अफ्रीका में जी20 नेताओं के शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की द्विपक्षीय बैठक के बाद उच्च-आकांक्षा वाले व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते पर बातचीत शुरू करने पर सहमति जताई है। प्रस्तावित सीईपीए वार्ताओं का उद्देश्य 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाना है।

Prev Article
पाकिस्तान: कराची में शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में आग लगने से 6 लोगों की मौत, 38 लापता

Articles you may like: