गोपेश्वर: उत्तराखंड की प्रसिद्ध नंदा देवी राजजात यात्रा को अगले वर्ष तक के लिए स्थगित कर दिया गया है। राजजात समिति के एक सदस्य ने यह जानकारी दी।
चमोली जिले के कर्णप्रयाग में रविवार को हुई राजजात समिति की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष राकेश कुंवर ने बताया कि इस वर्ष प्रस्तावित नंदा देवी राजजात यात्रा को स्थगित करने का निर्णय लिया गया है और अब यह यात्रा 2027 में आयोजित की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह फैसला समिति ने सर्वसम्मति से लिया है।
बर्फ से ढकी चोटियों और उच्च हिमालय के घास के मैदानों से होकर गुजरने वाली यह धार्मिक यात्रा सबसे कठिन और सबसे लंबी पैदल यात्राओं में से एक मानी जाती है, जिसे 22 से अधिक पड़ावों पर रुकते हुए पूरा किया जाता है। यह यात्रा 12 वर्षों के अंतराल पर आयोजित होती है और इस वर्ष अगस्त–सितंबर में प्रस्तावित थी। पिछली बार यह यात्रा वर्ष 2014 में आयोजित की गई थी।
कुंवर ने बताया कि इस वर्ष यात्रा के लिए शुभ मुहूर्त 19–20 सितंबर को पड़ता है और इस दौरान उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम काफी प्रतिकूल रहता है। उन्होंने कहा, “इस समय ओलावृष्टि, बर्फबारी और बारिश की संभावना रहती है, ठंड बढ़ जाती है और अभी भी निर्जन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा निर्माण कार्य पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में नंदा देवी राजजात यात्रा को सुरक्षित रूप से आयोजित करना संभव नहीं लगा, इसलिए इसे इस वर्ष के लिए स्थगित कर दिया गया।”
उन्होंने बताया कि अगले वर्ष नंदा देवी राजजात यात्रा के आयोजन के लिए बसंत पंचमी के दिन, 23 जनवरी को नौटी गांव में संकल्प लिया जाएगा और कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा की जाएगी। इस समारोह में गढ़वाल के कंसुवा गांव के राजकुमार श्री नंदा देवी मंदिर में नंदा राजजात के लिए संकल्प लेंगे और ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार आगे का कार्यक्रम घोषित करेंगे।
उन्होंने यह भी बताया कि इस वर्ष की यात्रा के लिए अभी तक कोई आधिकारिक कार्यक्रम तय नहीं किया गया था और इसकी घोषणा बसंत पंचमी के दिन पारंपरिक पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों के बाद ही की जानी थी।