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विराट रामायण मंदिर में पहुंचा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग, कब होगी स्थापना? क्या है इस जगह का महत्व?

क्यों विराट रामायण मंदिर के निर्माण के लिए चुना गया बिहार का केसरिया?

By Moumita Bhattacharya

Jan 08, 2026 16:33 IST

बिहार के पूर्वी चम्पारण के चकिया प्रखंड से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर बन रहा है 'विराट रामायण मंदिर'। दावा किया जा रहा है कि एक बार इस मंदिर का निर्माण पूरा हो जाने के बाद यह दुनिया का सबसे विशाल मंदिर कहलाएगा। वर्तमान में दुनिया का सबसे बड़ा हिंदू मंदिर कम्बोडिया का अंकोर वाट मंदिर है। 'विराट रामायण मंदिर' का निर्माण राजधानी पटना के महावीर मंदिर न्यास द्वारा किया जा रहा है। इसी मंदिर में स्थापित होगा दुनिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग।

इस शिवलिंग का निर्माण तमिलनाडु के महाबलिपुरम में किया गया है और लगभग 2500 किलोमीटर की लंबी यात्रा को सड़क मार्ग से तय कर बुधवार (7 जनवरी) को यह शिवलिंग चकिया के पास मौजूद विराट रामायण मंदिर के निर्माण स्थल पर पहुंचा। कब होगी इसकी स्थापना? क्यों विराट रामायण मंदिर को बनाने के लिए इस स्थान का ही चुनाव किया गया? क्या है इस स्थान का महत्व?

आइए आपको विस्तार से बताते हैं -

क्या है शिवलिंग की विशेषताएं?

तमिलनाडु के महाबलिपुरम में बनाया गया यह शिवलिंग न सिर्फ किसी मंदिर में स्थापित होने वाला विश्व का सबसे ऊंचा शिवलिंग है बल्कि दावा किया जा रहा है कि इस एक शिवलिंग का अभिषेक करने से 1008 शिवलिंगों के अभिषेक का पुण्य मिलेगा। काले रंग के ग्रेनाइट की चट्टान को तराशकर इस शिवलिंग का निर्माण किया गया है जिसका वजन करीब 250 टन बताया जाता है।

इस शिवलिंग को रामेश्वरम में स्थापित शिवलिंग के तर्ज पर ही बनाया गया है। इस शिवलिंग की लगभग 33 फीट की ऊंचाई और 33 फीट की गोलाई है। खास बात यह है कि इस शिवलिंग की सतह चिकनी नहीं है, बल्कि इसपर हजारों की संख्या में छोटे-छोटे शिवलिंगों को भी तराशा गया है। यह कोई साधारण शिवलिंग न होकर सहस्रलिंगम हैं।

क्या है इस जगह का महत्व?

'विराट रामायण मंदिर' का निर्माण पूर्वी चम्पारण के चकिया प्रखंड में कैथवलिया बहुआरा में किया जा रहा है जिसे स्थानीय लोग वृंदावन चंवर के नाम से जानते हैं। जिस स्थान पर इस मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, उसका धार्मिक महत्व भी है। मान्यताओं के अनुसार माता सीता को ब्याहने के बाद जब श्रीराम की बारात वापस अयोध्या लौट रही थी तब इसी स्थान पर उनकी बारात रुकी थी।

कहा जाता है कि माता सीता को लेकर जनकपुर से बारात के प्रस्थान करने के बाद दूसरे दिन यहां बारात रुकी थी। यह स्थान अयोध्या से जनकपुर (नेपाल) तक बन रहे राम-जानकी मार्ग का एक प्रमुख धार्मिक पड़ाव बनने वाला है।

कब होगी शिवलिंग की स्थापना?

तमिलनाडु के महाबलीपुरम से लगभग 100 चक्कों वाले ट्रक पर लादकर करीब 20 दिनों में 5 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से इस विशालकाय सहस्रलिंगम को चकिया तक पहुंचाया गया। 17 जनवरी को माघ कृष्ण चतुर्दशी के मौके पर इस सहस्रलिंग की पूरे विधि-विधान के साथ स्थापना की जाएगी।

बताया जाता है कि उस दिन 5 नदियों के पवित्र जल से इस शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा। लगभग 3 करोड़ के खर्च से इस शिवलिंग का निर्माण किया गया है। दावा किया जा रहा है कि इस शिवलिंग को तराशकर सहस्रलिंग बनाने में लगभग 10 सालों का समय लग गया है।

बता दें, विराट रामायण मंदिर लगभग 1080 फीट लंबा और 540 फीट चौड़ा होगा। इस मंदिर में 18 शिखर और 22 मंदिरों का समूह होगा। मुख्य शिखर की ऊंचाई 270 फीट होगी। इसके अलावा चार शिखरों की ऊंचाई 180 फीट, एक शिखर की ऊंचाई 135 फीट, 8 शिखरों की ऊंचाई 108 फीट और 1 शिखर की ऊंचाई 90 फीट होगी। वर्ष 2012 में इस मंदिर का भूमि पूजन हुआ था और साल 2023 से इस निर्माण कार्य शुरू हुआ। मंदिर के लिए जमीन मो. इश्तियाक खान ने दान में दी थी।

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