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हाथ आया पर मुंह को न लगा, नोबेल फाउंडेशन के कड़े रुख के बाद क्या डोनाल्ड ट्रंप को वापस लौटाना पड़ेगा पदक?

क्या यह नोबेल पदक आखिरकार डोनाल्ड ट्रंप अपने पास रख सकेंगे? यहां एक सवालिया निशान जरूर लग रहा है।

By Moumita Bhattacharya

Jan 19, 2026 01:16 IST

यह सप्ताह विश्व राजनीति एक बहुत ही अजीब घटना का साक्षी बना। वेनेजुएला की विरोधी पार्टी की नेता मारिया कोरिना माचादो ने अपने देश के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिका द्वारा अपहरण करने की 'खुशी' में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल पुरस्कार ही भेंट स्वरूप दे दिया।

माचादो के इस कदम ने अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में हड़कंप मचा दिया। पिछले लंबे समय से ही डोनल्ड ट्रंप अपने लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कर रहे हैं। हालांकि अभी तक डोनाल्ड ट्रंप को नोबेल पुरस्कार प्रदान नहीं किया गया है। ऐसे में माचादो द्वारा भेंट किया गया नोबेल उनके लिए दूध का स्वाद मट्ठे में पाने जैसा था। लेकिन...

क्या यह नोबेल पदक आखिरकार डोनाल्ड ट्रंप अपने पास रख सकेंगे? यहां एक सवालिया निशान जरूर लग रहा है क्योंकि माचादो का इस कारनामे को नोबेल कमेटी अच्छी नजरों से नहीं देख रहा है। रविवार को नोबेल फाउंडेशन ने एक विज्ञप्ति जारी की है, जिसमें कड़े शब्दों में एल्फ्रेड नोबेल की वसीयत की शर्तों को स्पष्ट भाषा में फिर से दोहराया है।

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क्या कहा नोबेल कमेटी ने?

अपनी इस विज्ञप्ति में नोबेल कमेटी ने कहा कि इस पुरस्कार की मर्यादा और पवित्रता की रक्षा करना ही फाउंडेशन का मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ ही स्पष्ट शब्दों में कहा गया है कि जो व्यक्ति मानव जाति के कल्याण में अपना योगदान देते हैं, सिर्फ और सिर्फ उन्हें ही यह सम्मान प्रदान किया जाता है। यह कोई आम वस्तु नहीं है जिसे जब चाहा किसी को दिया जा सकें।

साथ ही यह भी कहा गया है कि एक बार अगर किसी व्यक्ति को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुन लिया जाता है तो उस फैसले को बदला नहीं जा सकता है। वह फैसला स्थायी हो जाता है। उस व्यक्ति से नोबेल शांति पुरस्कार को छीना भी नहीं जा सकता है।

नोबेल कमेटी ने स्पष्ट शब्दों में कहा- यह पुरस्कार किसी भी प्रकार से, प्रतीकात्मक तौर पर भी किसी और को वितरित या हस्तांतरित नहीं किया जा सकता है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि माचादो का डोनाल्ड ट्रंप को अपना नोबेल पदक 'भेंट' में देना नोबेल पुरस्कारों की मौलिक नीति का उल्लंघन है, यह बात नोबेल फाउंडेशन ने सीधे शब्दों में स्पष्ट कर दिया है। अब देखने वाली बात होगी कि माचादो को अपनी 'भेंट' वापस लेने से संबंधित कोई निर्देश नोबेल कमेटी जारी करता है अथवा नहीं।

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