भारत और अमेरिका के बीच पिछले लगभग एक साल से टैरिफ और ट्रेड डील को लेकर तनातनी चल रही है। इस बीच एक गंभीर मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भारत की जरूरत महसूस हो रही है। मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ट्रंप ने भारत को गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है। पर यह है क्या? क्यों डोनाल्ड ट्रंप इसमें भारत को शामिल करना चाहते हैं?
Zee News की मीडिया रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को जिस गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता भेजा है, उसका उद्देश्य मिडिल ईस्ट में शांति स्थापित करना है। इसका काम गाज़ा में युद्ध के बाद नई सरकार और पुनर्निर्माण के कामकाज की देखभाल करना है।
दावा किया जा रहा है कि गाज़ा पीस बोर्ड की कमान खुद ट्रंप अपने हाथों में रखने वाले हैं। वहीं बोर्ड के चेयरमैन भी होंगे। इसमें एक एक्सपर्ट कमेटी और एग्जीक्यूटिव कमेटी का गठन किया जाएगा जो शासन व्यवस्था को चलाने के साथ ही सरकार के सलाहकार की अहम भूमिका निभाएगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से दावा किया जा रहा है कि पाकिस्तान ने भी दावा किया है कि उसे भी गाज़ा पीस बोर्ड में शामिल होने का न्योता मिला है। पर ट्रंप को आखिर भारत की जरूरत क्यों महसूस हो रही है?
बताया जाता है कि भारत के इज़रायल और फिलिस्तीन दोनों देशों के साथ ही रिश्ते अच्छे हैं। माना जाता है कि दोनों देश ही भारत की बात को मानते हैं। इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही अमेरिका ने इस बोर्ड में शामिल होने के लिए भारत को न्योता भेजा है। मीडिया रिपोर्ट में रॉयटर्स के हवाले से बताया गया है कि इस बोर्ड में शामिल होने का न्योता 60 देशों को भेजा गया है।
हालांकि कुछ देशों के अलावा अधिकांश देश सार्वजनिक तौर पर इस मामले में कोई भी बयान देने से बचते ही नजर आ रहे हैं। माना जा रहा है कि इससे संयुक्त राष्ट्र के काम पर असर पड़ सकता है और उसकी प्रासंगिकता पर खतरा मंडरा सकता है।