नई दिल्ली : कारों का माइलेज अधिक यथार्थवादी तरीके से दिखाने के लिए बड़ा बदलाव करने की दिशा में आगे बढ़ रही है केंद्र सरकार। अब एसी चालू और बंद—दोनों ही स्थितियों में माइलेज टेस्ट को अनिवार्य करने का प्रस्ताव सड़क परिवहन मंत्रालय ने दिया है। इसका उद्देश्य यह है कि वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप गाड़ियों की ईंधन खपत की जानकारी ग्राहकों को दी जा सके।
नए प्रस्ताव के अनुसार गाड़ियों की फ्यूल एफिशिएंसी टेस्टिंग एसी चालू अवस्था में और एसी बंद अवस्था में दोनों तरह से की जाएगी। इससे खरीदार यह समझ सकेंगे कि वास्तविक रूप से गाड़ी चलाने पर कितना ईंधन खर्च होता है। अब तक गाड़ियों का माइलेज आमतौर पर एसी बंद रखकर किए गए परीक्षण के आधार पर बताया जाता था। जिसके कारण कई मामलों में घोषित माइलेज और वास्तविक अनुभव के बीच अंतर रह जाता था।
सरकार ने बताया है कि यह नियम इंटरनल कंबशन इंजन (ICE) और इलेक्ट्रिक वाहन—दोनों पर लागू होगा। भारत में निर्मित या आयातित सभी यात्री वाहनों पर यह नियम प्रभावी होगा। प्रस्तावित अधिसूचना के अनुसार 1 अक्टूबर 2026 से एम1 श्रेणी की सभी गाड़ियों के लिए यह परीक्षण अनिवार्य किया जा सकता है।
इसके अलावा वाहन निर्माताओं को गाड़ी के यूजर मैनुअल में एसी चालू और बंद स्थिति का माइलेज अलग-अलग उल्लेख करना होगा। इससे खरीदारों को खरीद से पहले स्पष्ट जानकारी मिल सकेगी।
सरकार के अनुसार एसी के उपयोग से माइलेज और ऊर्जा खपत में काफी बदलाव आता है। इसलिए सड़क पर चलाने के वास्तविक अनुभव को दर्शाने के लिए यह कदम उठाया गया है। इससे पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्राहक अधिक जागरूक होकर खरीद का निर्णय ले सकेंगे।