नई दिल्ली : 14 फरवरी को ISL शुरू होने की तारीख तय होने के बावजूद अभी तक स्थिति काफी उलझी हुई है। ISL के संचालन के लिए AIFF ने जो नया चार्टर तैयार किया है उसे आठ क्लबों ने मान लिया है लेकिन बाकी 6 क्लबों ने अब तक स्वीकार नहीं किया है। फेडरेशन के अधिकारी इस मुद्दे पर मतदान कर इसे क्लबों पर थोपना नहीं चाहते। बल्कि 6 क्लबों की आपत्तियां कहां हैं यह जानकर प्रस्तावित चार्टर में कुछ बदलाव करना चाहते हैं। इसके लिए वकील काम कर रहे हैं। 20 जनवरी के भीतर इस काम को पूरा करने की कोशिश चल रही है। साथ ही यह भी निरीक्षण किया जा रहा है कि कहां, किस मैदान में मैच कराए जा सकते हैं। इसी वजह से ISL का खेल कार्यक्रम तैयार होने में अभी और कुछ समय लगने की बात फेडरेशन मान रहा है।
इधर क्लब पहले दबाव बनाकर फुटबॉलरों और कोचिंग स्टाफ का वेतन कम कराने की कोशिश कर रहे थे। इसी दबाव में एफसी गोवा के फुटबॉलर और कोच कम वेतन में खेलने के लिए राजी हो गए हैं लेकिन इस तरह झुकने को तैयार नहीं हैं मुंबई सिटी एफसी के फुटबॉलर। छांते की कप्तानी में मुंबई के फुटबॉलरों ने पहले ही साफ कर दिया है कि उन्हें उनके अनुबंध के अनुसार ही भुगतान करना होगा।
क्योंकि वे भुगतान के मामले में कई लोगों के साथ अनुबंधबद्ध होते हैं। नॉर्थ ईस्ट यूनाइटेड, केरल ब्लास्टर्स, चेन्नईयिन सिटी, बेंगलुरु एफसी जैसे क्लब वेतन कटौती की योजना बना रहे हैं लेकिन अभी तक कोई निर्णय नहीं ले पाए हैं। इसी बीच फुटबॉलरों की अंतरराष्ट्रीय संस्था फिफप्रो ने पत्र भेजकर क्लबों को बताया है कि फुटबॉलरों के अनुबंध का सम्मान करते हुए उन्हें उनका उचित पारिश्रमिक दिया जाए। हालांकि AIFF इस मामले में क्लबों के बीच दखल देने को तैयार नहीं है। उसने साफ बता दिया है कि यह क्लब और फुटबॉलरों के बीच का मामला है। फेडरेशन इसमें पक्षकार नहीं बनना चाहता।