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अडानी सोलर ग्लोबल टॉप 10 में, भारत का सोलर उद्योग बन रहा विश्व स्तर पर मजबूत

Wood Mackenzie की रैंकिंग में 8वां स्थान और ग्रेड A रेटिंग से खुलता है भारतीय सोलर मैन्युफैक्चरिंग का भविष्य।

By श्वेता सिंह

Jan 18, 2026 18:25 IST

नयी दिल्लीः अडानी सोलर का Wood Mackenzie की ग्लोबल सोलर मॉड्यूल मैन्युफैक्चरर रैंकिंग में टॉप 10 में शामिल होना केवल कंपनी की सफलता नहीं है, बल्कि भारत के सोलर उद्योग के वैश्विक स्तर पर प्रवेश का प्रतीक है। यह रैंकिंग केवल उत्पादन क्षमता पर आधारित नहीं है। इसमें तकनीकी क्षमता, वित्तीय स्थिरता, R&D निवेश, ESG (पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक) प्रथाएं और कॉर्पोरेट जिम्मेदारी जैसे 10 मापदंडों का विश्लेषण शामिल है।

इस हाइलाइट से साफ होता है कि भारत के खिलाड़ी अब चीनी डॉमिनेशन वाले वैश्विक बाजार में चुनौती पेश कर रहे हैं। यह प्रतिस्पर्धा सिर्फ मात्रा पर नहीं बल्कि गुणवत्ता और नवाचार पर आधारित है। अडानी सोलर ने H1 2025 में 100% उत्पादन क्षमता बनाए रखकर यह दिखाया कि भारतीय कंपनियां सप्लाई चेन और प्रोडक्शन दक्षता में वैश्विक मानकों के अनुरूप हैं।

रिपोर्ट में यह भी उल्लेखनीय है कि टॉप 10 कंपनियों ने मिलकर 224 GW मॉड्यूल शिप किए, जबकि वैश्विक औसत उपयोग दर केवल 43% रही। इसका मतलब यह है कि गुणवत्ता और प्रीमियम मार्केट पर ध्यान केंद्रित करने वाली गैर-चीनी कंपनियां लाभकारी बनीं, जबकि चीनी कंपनियों ने भारी नुकसान उठाया।

अडानी सोलर की उपलब्धियां केवल आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं हैं। 15,000 MW मॉड्यूल शिपिंग, 70% इन-हाउस सेल्स और 8,000 सीधे रोजगार इसका स्थानीय और राष्ट्रीय विकास पर सकारात्मक प्रभाव दर्शाते हैं। साथ ही, भारत की सोलर निर्माण क्षमता 140 GW तक बढ़कर इसे विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर ला चुकी है।

वैश्विक व्यापार नीति और सीमा-पार ट्रेड नीतियों के प्रभाव से चीन के प्रभुत्व में गिरावट आई है। भारत, अमेरिका, सिंगापुर और दक्षिण कोरिया के खिलाड़ी तेजी से प्रीमियम और सुरक्षित बाजारों में प्रवेश कर रहे हैं। अडानी सोलर की वृद्धि और क्षमता विस्तार (10,000 MW प्रति वर्ष) भारत के ऊर्जा आत्मनिर्भरता और ग्लोबल क्लीन एनर्जी नेतृत्व की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।

अडानी सोलर की यह रैंकिंग भारतीय सोलर उद्योग की विश्वसनीयता, तकनीकी क्षमता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में मजबूती को दर्शाती है। भविष्य में यदि इसी तरह के निवेश और उत्पादन क्षमता विस्तार जारी रहा तो भारत सोलर उत्पादन और निर्यात दोनों में चीन को चुनौती देने में सक्षम हो सकता है।

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