नेताजी सुभाष चंद्र बोस के बड़े भाई शरत चंद्र बोस के पोते व नेताजी के भतीजे अमिय नाथ बोस के बेटे चंद्र कुमार बोस को SIR की सुनवाई का नोटिस भेजा गया था। सोमवार को सुनवाई के लिए पहुंचे चंद्र कुमार बोस ने SIR की प्रक्रिया को लेकर अपना असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह महत्वपूर्ण तो है, लेकिन इसका सही तरीके से संचालन नहीं किया जा रहा है।
साल 2016 के विधानसभा और 2019 में भाजपा की टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ चुके चंद्र कुमार बोस ने कहा कि मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण लोगों के लिए केवल परेशानी की वजह बन गया है और इसकी प्रक्रिया साफ नहीं है। 60 वर्षीय चंद्र कुमार बोस ने बताया कि उनकी पत्नी और बेटी 16 जनवरी को SIR की सुनवाई प्रक्रिया के लिए आयोग के अधिकारियों के सामने पहुंचे जबकि उनके दो बेटे जो वर्तमान में विदेश में रहते हैं, ने उन्हें ही अपनी जगह पर दस्तावेजों को प्रस्तुत करने का अधिकार सौंपा है।
उन्होंने कहा, 'SIR की प्रक्रिया बहुत महत्वपूर्ण है लेकिन जिस तरीके से इसका संचालन हो रहा है, वह ठीक नहीं है। SIR के नाम पर आम लोगों को सिर्फ परेशान किया जा रहा है। मुझे इसे इतनी जल्दबाजी में संचालित करने की कोई वजह नजर नहीं आ रही है।'
उन्होंने दावा किया कि उन्होंने और उनके परिवार ने एन्यूमरेशन फॉर्म के साथ ही सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करवा दिए थे। इसके बावजूद उन्हें सुनवाई के लिए बुलाया गया है। इसकी जो वजह बतायी गयी, वह भी काफी अजीब था। चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना था कि लिंकेज में कोई समस्या हो रही है। मैं इसकी शिकायत इसलिए नहीं कर रहा हूं कि मुझे SIR में सुनवाई के लिए बुलाया गया है। बल्कि पूरी प्रक्रिया ही काफी जल्दबाजी में निपटायी जा रही है और पारदर्शिता का अभाव है।
बोस ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पहले उन्होंने कहा कि मेरा नाम 2002 के मतदाता सूची में नहीं मिला। बाद में उन्हें मेरा नाम मिल गया। अब जब सभी वैध दस्तावेजों के साथ फॉर्म जमा कर दिए गए हैं तो उनको लिंकेज की समस्या हो गयी है। अगर यह कोई तकनीकी समस्या है तो फिर इसके लिए कौन जिम्मेदार होगा?