दावोसः दावोस 2026 में जारी WEF की ग्लोबल वैल्यू चेन आउटलुक रिपोर्ट के अनुसार, वैश्विक सप्लाई चेन अब सिर्फ अस्थायी झटकों का सामना नहीं कर रही, बल्कि संरचनात्मक अस्थिरता के युग में प्रवेश कर चुकी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों और सरकारों को यह नए तरीके से सोचने की जरूरत है कि उत्पादन कहां किया जाए, निवेश कैसे सुरक्षित करें और सप्लाई नेटवर्क को किस तरह लचीला और टिकाऊ बनाया जाए।
रिपोर्ट के मुताबिक यह अस्थिरता किसी एक संकट का परिणाम नहीं है, बल्कि वैश्विक व्यापार और वैल्यू चेन के मूलभूत पुनर्गठन का संकेत है। भू-राजनीतिक तनाव, औद्योगिक और व्यापार नीतियों में बदलाव, ऊर्जा संक्रमण और तकनीकी तेजी ने पारंपरिक वैश्वीकरण मॉडल को कमजोर कर दिया है। पहले जहां लागत और दक्षता को प्राथमिकता दी जाती थी, अब रिज़िलिएंस, विकल्पों की उपलब्धता और नीति स्थिरता मुख्य निर्णायक कारक बन चुके हैं।
सप्लाई चेन लचीलापन अब कंपनियों और देशों की प्राथमिकता
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि चार में से तीन कारोबारी नेता अब सप्लाई चेन रिज़िलिएंस को केवल जोखिम प्रबंधन का विषय नहीं, बल्कि विकास और प्रतिस्पर्धा का प्रमुख आधार मानते हैं। 2025 में वैश्विक व्यापार में भारी बदलाव देखने को मिला। प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के बीच टैरिफ बढ़ोतरी से 400 अरब डॉलर से अधिक व्यापार प्रवाह प्रभावित हुआ, जबकि प्रमुख शिपिंग मार्गों में व्यवधानों के कारण कंटेनर शिपिंग लागत में 40% की बढ़ोतरी हुई।
इसके साथ ही विकसित देशों में मैन्युफैक्चरिंग उत्पादन की वृद्धि दर 2009 के बाद सबसे धीमी रही, जबकि वैश्विक स्तर पर 3,000 से ज्यादा नई व्यापार और औद्योगिक नीतियां लागू की गईं। इसका मतलब है कि सरकारें अब रणनीतिक स्वायत्तता और घरेलू क्षमता निर्माण पर अधिक जोर दे रही हैं।
भारत के लिए अवसर: तमिलनाडु बन गया भरोसेमंद औद्योगिक केंद्र
रिपोर्ट में तमिलनाडु को वैश्विक निवेश के लिए भरोसेमंद केंद्र के रूप में पेश किया गया है। राज्य की राजनीतिक स्थिरता, पूर्वानुमेय नीतियां, मजबूत बुनियादी ढांचा और कुशल कार्यबल विदेशी निवेशकों को आकर्षित कर रहे हैं। पिछले 15 वर्षों में राज्य की नीतियों ने लंबी अवधि के निवेश को आसान बनाया।
जापानी कंपनियों ने संचालन में सुविधा और तेज मंजूरी की सराहना की, जबकि वियतनाम की इलेक्ट्रिक वाहन निर्माता कंपनी विनफास्ट ने अपनी 50,000-यूनिट उत्पादन इकाई केवल 17 महीनों में स्थापित की, जो सामान्य समय 24-36 महीनों के मुकाबले काफी तेज है।
रिपोर्ट में आयरलैंड, चीन और कतर के उदाहरण भी दिए गए हैं, जहां स्पष्ट राष्ट्रीय नीतियां और मजबूत संस्थागत क्षमता मैन्युफैक्चरिंग प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद कर रही हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि अस्थिरता के दौर में भी नीति स्थिरता और संस्थागत मजबूती वाले देश निवेश आकर्षित कर सकते हैं।
भविष्य का फार्मूला: लचीलापन, बहु-स्तरीय सप्लाई नेटवर्क और नीति स्थिरता
WEF की मैनेजिंग डायरेक्टर कीवा ऑलगुड का कहना है कि अब अस्थिरता कोई अस्थायी बाधा नहीं है, बल्कि यह एक स्थायी और संरचनात्मक चुनौती बन चुकी है। आने वाले वर्षों में सफलता उन्हीं देशों और कंपनियों को मिलेगी जो लचीलापन, बहु-स्तरीय सप्लाई नेटवर्क और नीति स्थिरता को अपनाएंगे।
रिपोर्ट यह भी संकेत देती है कि अब प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त केवल लागत-कटौती और दक्षता से नहीं बल्कि दूरदर्शिता, विकल्पों की उपलब्धता और उद्योग-सरकार समन्वय से तय होगी। जो देश और कंपनियां इन मानकों को अपनाएंगी, वही बदलते वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में टिकाऊ विकास और निवेश आकर्षित कर पाएंगी।