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2026 के केंद्रीय बजट से मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा करदाताओं की ये 13 प्रमुख उम्मीदें

विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थाओं के अनुसार बजट 2026 में कर ढांचे में कई बदलाव हो सकते हैं।

By अंशुमान गोस्वामी, Posted by : राखी मल्लिक

Jan 24, 2026 17:36 IST

नई दिल्ली : 2025 के बजट के बाद करदाताओं की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। आगामी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए जाने वाले बजट पर मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं। विभिन्न विशेषज्ञों और संस्थाओं के अनुसार बजट 2026 में कर ढांचे में कई बदलाव देखने को मिल सकते हैं। नीचे ऐसी ही 13 प्रमुख अपेक्षाओं का उल्लेख किया गया है।

HRA की सीमा बढ़ाने की मांग:

वर्तमान में मेट्रो शहरों में वेतन का 50 प्रतिशत और नॉन-मेट्रो शहरों में 40 प्रतिशत तक हाउस रेंट अलाउंस पर कर छूट मिलती है। विशेषज्ञों का मानना है कि किराये का बाजार बदल चुका है खासकर टियर-2 शहरों में किराया काफी बढ़ गया है। इसलिए वास्तविक स्थिति के अनुरूप HRA की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए।

NRI के लिए 182 दिन का नियम:

मौजूदा नियमों के तहत प्रवासी भारतीयों की रेजिडेंशियल स्थिति जटिल हो गई है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि कर संबंधी भ्रम कम करने के लिए 182 दिन के नियम को फिर से लागू किया जाए।

स्टैंडर्ड डिडक्शन में बढ़ोतरी:

नई कर व्यवस्था में नौकरीपेशा लोगों को 75,000 रुपये की स्टैंडर्ड डिडक्शन मिलती है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे बढ़ाकर कम से कम 1 लाख से 1.5 लाख रुपये किया जाना चाहिए।

कैपिटल गेन पर टैक्स रिबेट:

हालांकि 12 लाख रुपये तक की आय करमुक्त है लेकिन शेयर या म्यूचुअल फंड से होने वाली आय पर रिबेट नहीं मिलती। विशेषज्ञों का मानना है कि इक्विटी निवेश के मामले में भी यह छूट दी जानी चाहिए।

स्वास्थ्य बीमा पर कर छूट:

नई कर व्यवस्था में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर कोई छूट नहीं है। बजट 2026 में नई टैक्स व्यवस्था के तहत भी इस सुविधा को लागू करने का प्रस्ताव है।

होम लोन के ब्याज पर अधिक छूट:

वर्तमान में गृह ऋण के ब्याज पर मिलने वाली छूट काफी सीमित है। घरों की कीमतें बढ़ चुकी हैं इसलिए इस सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपये करने की मांग उठ रही है।

किराये की आय की गणना को सरल बनाना:

लेट-आउट प्रॉपर्टी के मामले में वास्तविक किराये पर कर लगाने और 30 प्रतिशत स्टैंडर्ड डिडक्शन देने का प्रस्ताव रखा गया है।

सिर्फ दो TDS दरें:

फिलहाल छह तरह की TDS दरें लागू हैं—0.1%, 1%, 2%, 5%, 10% और 20%। ICAI का सुझाव है कि इन्हें घटाकर केवल 1 प्रतिशत और 5 प्रतिशत किया जाए।

रिफंड ट्रैकिंग सिस्टम:

2025 में कई करदाताओं को रिफंड मिलने में देरी हुई। इसलिए रियल-टाइम ट्रैकिंग डैशबोर्ड बनाने और रिफंड पर ब्याज दर बढ़ाने का प्रस्ताव दिया गया है।

सरचार्ज की सीमा बढ़ाने की मांग:

नई आयकर व्यवस्था में 50 लाख रुपये से अधिक आय पर सरचार्ज लगाया जाता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस सीमा को बढ़ाकर 75 लाख रुपये किया जाए।

सोना-चांदी के लिए होल्डिंग पीरियड कम करने की मांग:

गोल्ड ETF में निवेश को एक साल बाद लॉन्ग टर्म एसेट माना जाता है जबकि फिजिकल गोल्ड को दो साल बाद लॉन्ग टर्म एसेट माना जाता है। इसे घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव है।

दंपतियों के लिए संयुक्त कर प्रणाली:

भारत में पति और पत्नी अलग-अलग करदाता माने जाते हैं। ICAI ने सुझाव दिया है कि इच्छुक दंपतियों को संयुक्त रूप से टैक्स रिटर्न दाखिल करने का विकल्प दिया जाए, जिससे एकल कमाने वाले परिवारों को लाभ मिल सके।

NPS नियमों में स्पष्टता:

नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश को लेकर कर नियमों में भ्रम बना हुआ है। बजट 2026 में डबल टैक्सेशन समाप्त करने की मांग उठी है।

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