नई दिल्ली : अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। कई दौर की बातचीत के बावजूद इसमें कोई कमी नहीं आई। इसी बीच नई दिल्ली यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता करने जा रही है। मंगलवार को भारत और यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि इस समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। विशेषज्ञों के एक वर्ग मानना है कि इसके चलते सिर्फ व्यापार ही नहीं, बल्कि भारत और यूरोप के रिश्तों के समग्र स्वरूप में बड़ा बदलाव आने की संभावना है।
यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को लेकर बातचीत की शुरुआत 2007 में हुई थी। 19 वर्षों तक के लंबे चरणबद्ध बातचीत के बाद आखिरकार यह द्विपक्षीय व्यापारिक समझौता अंतिम रूप ले रहा है। इस समझौते को मदर ऑफ ऑल डील्स की संज्ञा यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरुसुला फॉन डर लायेन ने दी है। वह पिछले शनिवार भारत पहुंची थीं। इसके बाद उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक की, जहां समझौते को अंतिम रूप देने पर चर्चा हुई। इसके साथ ही वह गणतंत्र दिवस समारोह में भी शामिल हुईं।
हालांकि आज समझौते पर हस्ताक्षर हो जाने के बाद भी इसे लागू करने के लिए भारत की केंद्रीय कैबिनेट और यूरोपीय संसद की मंजूरी जरूरी होगी। इसके लिए अभी कुछ और महीने लग सकते हैं। केंद्रीय सरकार के सूत्रों के अनुसार इस समझौते में कुल 24 अध्याय हैं। इनमें वस्तुओं, सेवाओं और निवेश से जुड़े मुद्दों के साथ-साथ निवेश सुरक्षा और जीआई (भौगोलिक संकेत) को भी शामिल किया गया है।
समझौता हस्ताक्षर कार्यक्रम
आज सुबह 11 बजकर 10 मिनट पर यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उरुसुला फॉन डर लायेन राजघाट में महात्मा गांधी की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित करेंगी। इसके बाद वह हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक में शामिल होंगी। वहीं दोनों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। इसके बाद दोपहर 1 बजकर 15 मिनट पर मोदी और लायेन संयुक्त प्रेस वार्ता करेंगे। शाम को उनके भारत मंडपम में एक कारोबारी सम्मेलन में शामिल होने की बात है। इसके अलावा शाम में वह उपराष्ट्रपति और राष्ट्रपति से भी मुलाकात करेंगी।
शुल्क में छूट
इस समझौते के चलते निर्यात के क्षेत्र में नई दिल्ली को बड़ा लाभ मिलेगा। यूरोपीय देशों में भारतीय व्यापारी वस्त्र, रसायन, रत्न और आभूषण, विद्युत उपकरण, चमड़े के सामान, जूते आदि कम शुल्क पर बेच सकेंगे। फिलहाल भारतीय उत्पादों पर औसतन 3.8 प्रतिशत शुल्क लगता है जो कुछ मामलों में 10 प्रतिशत तक है। वहीं यूरोपीय उत्पादों पर भारत औसतन 9.3 प्रतिशत शुल्क लगाता है। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों के 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर या तो शुल्क कम किया जाएगा या पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
व्यापार का आकार
भारत के कुल निर्यात का 17 प्रतिशत यूरोप को जाता है जबकि आयात करीब 9 प्रतिशत के आसपास है। वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार का कुल मूल्य 136.53 अरब डॉलर रहा। इसमें से 75.85 अरब डॉलर का निर्यात किया गया, जिसमें पेट्रोलियम उत्पाद, इलेक्ट्रॉनिक्स, वस्त्र और परिधान, मशीनरी, रसायन, दवाइयां, रत्न और आभूषण, वाहन पुर्जे, जूते और कॉफी प्रमुख हैं। वहीं 60.68 अरब डॉलर का आयात किया गया, जिसमें मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, विमान, चिकित्सा उपकरण, रसायन और प्लास्टिक शामिल हैं।
रणनीतिक महत्व
ट्रंप के टैरिफ के कारण भारत की तरह यूरोप भी दबाव में है। इसके साथ ही चीन की आक्रामक उत्पादन नीति ने उनकी चिंताएं और बढ़ा दी हैं। ऐसे में दोनों पक्षों के लिए इस समझौते की जरूरत बढ़ गई है। ट्रंप के टैरिफ से पड़े झटके की भरपाई के लिए नई दिल्ली ब्रिटेन और यूरोप के साथ व्यापार बढ़ाना चाहती है। गौरतलब है कि 2014 के बाद यह एनडीए सरकार का कुल आठवां बड़ा व्यापार समझौता है।