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पुस्तक मेले में युवा कथाकारों की कहानियों का विशेषांक बना आकर्षण का केन्द्रः ‘गल्पो स्वल्पो’ -खण्ड-2 में 50 कहानियां

पिछले पुस्तक मेले में पहला खण्ड प्रकाशित हुआ था। लगातार दो वर्षों में कुल 100 नए लेखकों की खोज महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

By सुपर्ण मुखोपाध्याय, Posted by डॉ.अभिज्ञात

Jan 24, 2026 18:56 IST

कोलकाताः चुनौती पिछले साल के पुस्तक मेले में स्वीकार की थी। । 50 नए लेखकों की कहानियों के साथ ‘एई समय’ का ‘गल्पो स्वल्पो’ अपनी यात्रा पर निकला था। वही यात्रा अब दूसरे वर्ष में प्रवेश कर चुकी है। दो जिल्दों के भीतर कल्पना की धारा नदी की तरह बहती चलती है। इस साल भी पाठकों के लिए 50 नए युवा लेखकों की कहानियों की थाली सजाकर ‘गल्पो स्वल्पो’ खण्ड–2 तैयार किया गया है।

इस पुस्तक का औपचारिक लोकार्पण शुक्रवार को पुस्तक मेले में ‘इस समय’ के पवेलियन में हुआ। पुस्तक मेले के गेट नंबर 4 से प्रवेश कर थोड़ा आगे सीधे जाकर बाईं ओर मुड़ते ही ‘इस समय’ का पवेलियन है-स्टॉल नंबर 198। वहीं पाठक युवा लेखकों की सतरंगी कल्पनाओं को मुद्रित अक्षरों में संजोकर पा सकते हैं।

‘गल्पो स्वल्पो’ खण्ड -2 का लोकार्पण कवि व साहित्यकार विनायक बंद्योपाध्याय और साहित्यकार तिलोत्तमा मजूमदार ने किया। तिलोत्तमा की एक और पहचान यह है कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी वे ‘गल्पो स्वल्पो’ की अतिथि संपादक हैं।

छोटी कहानियों के प्रति दुनिया भर के पाठकों में स्वाभाविक आकर्षण होता है। दरअसल कहानियां इस विशाल जीवन की खंडित रोशनी की माला हैं। रूसी लेखक आंतोन चेखव के अनुसार, लघु कथा “स्लाइस ऑफ लाइफ” यानी जीवन का एक टुकड़ा होती है।

खंड-खंड घटनाओं और चित्र-टुकड़ों के माध्यम से पाठक के सामने एक संपूर्ण संसार की तस्वीर उभरती है। तिलोत्तमा के शब्दों में, “बांग्ला कहानी स्रष्टा रवींद्रनाथ ठाकुर के अनुसार, कहानी वह है जो समाप्त होकर भी समाप्त नहीं होती। यह अतृप्ति लेखक और पाठक दोनों की साझा नियति है।”

उस दिन ‘एई समय’ के पवेलियन में बड़ी संख्या में रसिक पाठक इस पुस्तक के लोकार्पण के साक्षी बने। उन्होंने चर्चा सुनी, जिसका मुख्य विषय कहानी ही था। ‘एई समय’ को धन्यवाद देते हुए विनायक ने कहा, “लगातार दो वर्षों में कुल 100 नए लेखकों की खोज के लिए मैं ‘एई समय’ को नमन करता हूँ। यह बांग्ला साहित्य की एक बड़ी उपलब्धि है। यह धन्यवाद औरों को भी मिल सकता था लेकिन ‘एई समय’ की तरह उन्होंने सोचा नहीं।”

वास्तव में ‘एई समय’ ने पहले दिन से ही यह तय किया था कि ‘गल्पो स्वल्पो’ में उन्हीं लेखकों की कहानियाँ प्रकाशित होंगी, जिनकी उम्र 45 वर्ष से अधिक नहीं है। बहुत कम समय की सूचना पर पिछले वर्ष इस पुस्तक का पहला भाग प्रकाशित हुआ था और पुस्तक मेले में इसकी लगभग हर प्रति बिक गई थी। इस अभूतपूर्व प्रतिक्रिया के बाद इस वर्ष भी वही योजना अपनाई गई, जिसमें संपादक तिलोत्तमा ने और 50 नए लेखकों की कहानियाँ चुनीं। उस दिन उन्होंने कहानीकारों के साथ-साथ पुस्तक के चित्रांकन से जुड़े कलाकारों को भी विशेष धन्यवाद दिया। वे भी उम्र में युवा हैं।

तिलोत्तमा के अनुसार, “हर एक चित्र मानो अलग-अलग कहानी कहता है। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का चित्रांकन अधिक परिपक्व और आकर्षक है।”

वहीं, विनायक बार-बार नए लेखकों और नई लेखन-धाराओं के महत्व पर लौटते रहे। उन्होंने जोड़ा, “मैं अनुरोध करना चाहता हूँ कि पहले खण्ड का पुनर्मुद्रण किया जाए और तीसरे खण्ड पर भी विचार शुरू हो।”

तिलोत्तमा ने जड़ लेखन से बाहर निकलकर बांग्ला साहित्य में नई धारा गढ़ने का आह्वान किया और नए लेखकों के लिए कार्यशालाएँ आयोजित करने का सुझाव भी दिया।

पुस्तक मेले की उड़ती धूल के बीच गार्गी और श्रेयसी जैसी युवतियों के साथ पाठकों का गंतव्य बने ‘एई समय’ के पवेलियन में ‘गल्पो स्वल्पो’ के साथ हर दिन एंकर हंट, क्विज़ और विशिष्ट व्यक्तियों की चर्चाएँ होंगी तथा उनसे मिलने का अवसर भी मिलेगा।

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