कोलकाता : कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले के प्रेस कॉर्नर में “यूक्रेन की कंटेंपररी आवाजें” विषय पर एक घंटे की लाइव रीडिंग और ट्रांसलेशन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस साहित्यिक सत्र में समकालीन यूक्रेनी साहित्य को इंग्लिश और बांग्ला भाषाओं में पाठकों के सामने प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य यूक्रेनी लेखकों की उन रचनाओं को सामने लाना था जिनका अनुवाद भारतीय भाषाओं में किया गया है ताकि स्थानीय पाठक उनसे सीधे जुड़ सकें।
इस अवसर पर प्रसिद्ध यूक्रेनी लेखक ल्युबको डेरेश सहित देबासिस दास, अमल कुमार मंडल और सुलग्ना मुखोपाध्याय ने भाग लिया। सुलग्ना मुखोपाध्याय ने अपनी अनूदित पुस्तकों से कई कविताओं की बारी-बारी से इंग्लिश और बंगला में रीडिंग दी। इसके साथ ही उन्होंने अपने एक कहानी संग्रह के चुनिंदा अंश भी पढ़े, जिससे श्रोताओं को यूक्रेन की सामाजिक और मानवीय संवेदनाओं की झलक मिली।
कार्यक्रम के दौरान सभी वक्ताओं ने क्रमशः अपनी-अपनी अनूदित रचनाओं का पाठ किया और यूक्रेन से जुड़ी कहानियों को साझा किया। मंच संचालन वोलो डोमिस प्रितुला ने किया जिन्होंने यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कुशलता से मंच का संचालन करते हुए अनुवादकों और लेखकों को अपनी रचनाएं प्रस्तुत करने का अवसर दिया। अमल कुमार मंडल ने भी साहित्य के माध्यम से युद्धजनित पीड़ा और मानवीय संकट पर अपने विचार रखे।
इस वर्ष पुस्तक मेले में यूक्रेन पहली बार भाग ले रहा है। सीमित स्थान में लगाए गए यूक्रेनी स्टॉल में अधिकांश पुस्तकें प्रदर्शनी के लिए रखी गई हैं जबकि कुछ बंगला और इंग्लिश अनुवादित कृतियों की बिक्री हो रही है। सुलग्ना मुखोपाध्याय के अनुसार उनकी अनूदित पुस्तकों की मांग इतनी अधिक रही कि स्टॉक लगभग समाप्त हो गया। छोटे स्तर पर भागीदारी के बावजूद यूक्रेनी लेखकों और प्रकाशकों ने उत्साह व्यक्त किया और भविष्य में भी कोलकाता पुस्तक मेले से जुड़ने की इच्छा जताई।