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पर्यावरण और रोजगार का संगम बना कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेला

हर गेट के पास दिखे जूट बैग के स्टॉल, हजारों झोलों की रोजाना बिक्री।

By रजनीश प्रसाद

Jan 28, 2026 09:13 IST

कोलकाता : कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में इस वर्ष पुस्तकों और खान-पान के स्टॉलों के अलावा जिस वस्तु ने सबसे अधिक लोगों का ध्यान खींचा, वह है जूट बैग और झोले। मेले में प्रवेश करते ही चाहे वह किसी भी द्वार से हो कुछ ही दूरी पर जूट बैगों के रंग-बिरंगे स्टॉल नजर आ जाते हैं। उल्लेखनीय है कि पुस्तक मेले में कुल नौ मुख्य प्रवेश द्वार हैं और लगभग हर द्वार के आसपास जूट बैग की दुकानें सजी हुई हैं।

पटसन और कपास से बने ये बैग विभिन्न रंगों, डिजाइनों और आकारों में उपलब्ध हैं। बड़ी संख्या में पाठक पुस्तकें खरीदने के बाद उन्हें रखने और ले जाने के लिए जूट बैग खरीदते दिखे वहीं कई लोग इन्हें अपने दैनिक उपयोग के लिए भी पसंद कर रहे हैं। मेले में मौजूद विक्रेताओं के अनुसार इस बार जूट बैगों की मांग उम्मीद से कहीं अधिक रही है।

स्टॉल संचालकों से बातचीत में पता चला कि पूरे पुस्तक मेले में करीब 40 से 45 जूट बैग के स्टॉल लगाए गए हैं। ये सभी स्टॉल राष्ट्रीय पटसन बोर्ड (नेशनल जूट बोर्ड) द्वारा उपलब्ध कराए गए हैं जो भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत आता है। नेशनल जूट बोर्ड इस अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले का एनवायरमेंट पार्टनर भी है, जिसका उद्देश्य प्लास्टिक के उपयोग को कम कर पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों को बढ़ावा देना है।

विक्रेताओं का कहना है कि प्रतिदिन हजारों की संख्या में जूट बैग और झोले बिक रहे हैं। खास बात यह है कि लगभग 95 प्रतिशत ग्राहक बिना मोलभाव के दुकानदार द्वारा बताई गई कीमत चुकाने को तैयार हैं। इससे विक्रेताओं का लाभ संतोषजनक बना हुआ है और वे इस पहल से काफी खुश नजर आ रहे हैं।

एक विक्रेता ने बताया कि नेशनल जूट बोर्ड पूरे भारत में लगने वाले विभिन्न मेलों जैसे पुस्तक मेला, शिशु मेला, बसंत मेला और अन्य आयोजनों में स्टॉल लगवाने की सुविधा देता है। विक्रेताओं को केवल बिक्री का कार्य करना होता है, जिससे उनकी आय में निरंतरता बनी रहती है।

नेशनल जूट बोर्ड और केंद्र सरकार का मानना है कि जूट बैगों के प्रचार से लोगों को प्लास्टिक थैलों से दूरी बनाने और हरित जीवनशैली अपनाने का संदेश मिल रहा है। कोलकाता अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में जूट बैगों की लोकप्रियता इस बात का प्रमाण है कि लोग अब पर्यावरण के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं।

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रिकॉर्ड 32 लाख पाठकों संख्या के साथ संपन्न हुआ कोलकाता पुस्तक मेला

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