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कवियों और लेखकों ने साझा किए रचना के अनुभव ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में विचारों की बहुरंगी छटा

कोलकाता पुस्तक मेले में रचनात्मक संवाद का आयोजन, छायावाद ने रचा स्थानीय और वैश्विक चेतना का सेतु।

By रजनीश प्रसाद

Jan 29, 2026 21:24 IST

कोलकाता : कोलकाता पुस्तक मेला प्रांगण में वाणी प्रकाशन के साहित्य घर में आयोजित ‘लेखक से मिलिए’ कार्यक्रम में साहित्यिक विमर्श की जीवंत झलक देखने को मिली। इस अवसर पर वरिष्ठ आलोचक शंभुनाथ, लेखिका शर्मिला जालान, कवयित्री उमा झुनझुनवाला और लेखिका अनिला राखेचा से संस्कृति कर्मी संजय जायसवाल ने उनकी नवीनतम पुस्तकों और रचनात्मक सोच पर संवाद किया।

शंभुनाथ ने अपनी चर्चित पुस्तक ‘छायावाद का देश’ पर बोलते हुए कहा कि छायावादी कवियों ने जिस भारत की कल्पना की थी वह अनेक रंगों और संस्कृतियों से भरा हुआ था। उस साहित्य में स्थानीय जीवन और अनुभवों के लिए पर्याप्त जगह थी। उन्होंने कहा कि भक्ति काल के बाद छायावाद हिंदी साहित्य का दूसरा स्वर्णिम दौर माना जाता है। छायावाद के कवियों ने स्थानीयता, राष्ट्रीयता और अंतरराष्ट्रीयता के आपसी संबंधों को समझने और व्यक्त करने का प्रयास किया, जिससे साहित्य का दायरा व्यापक हुआ।

कवयित्री उमा झुनझुनवाला ने अपने कविता संग्रह ‘मैं और मेरा मन’ के बारे में बताते हुए कहा कि इस संग्रह में केवल उनकी व्यक्तिगत भावनाएं नहीं बल्कि समाज और परिवार के बीच जी रही स्त्रियों के मन की पीड़ा और सोच को स्वर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कविता के बिना नाटक अधूरा है क्योंकि नाटक की संवेदनशीलता कविता से ही पूरी होती है। उनके अनुसार रंगमंच जीवन का साहित्यिक रूपांतरण है जहां भावनाओं के बीच कविता स्वतः जन्म लेती है।

अनिला राखेचा ने अपने नए कविता संग्रह ‘काजल की मेड़’ पर चर्चा करते हुए कहा कि एक सच्चा कवि अपने भीतर चल रहे अंतर्द्वंद्व से ही रचना करता है। कविता उन भावनात्मक टकरावों को सहेजने का माध्यम बनती है। उन्होंने बताया कि उनकी कहानियां अनुभव और संवेदना से शुरू होती हैं और लेखन के दौरान दुःख के कई रूप सामने आते हैं।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए संजय जायसवाल ने लेखकीय जिम्मेदारी, लेखन प्रक्रिया, निजी अनुभव और समकालीन मुद्दों पर सार्थक संवाद कराया। अंत में धन्यवाद ज्ञापन देते हुए रामनिवास द्विवेदी ने कहा कि सामान्य व्यक्ति अपना जीवन जीता है, जबकि रचनाकार पूरे समाज के जीवन को अपने लेखन में समेटता है।

इस अवसर पर मृत्युंजय श्रीवास्तव, पद्माकर व्यास, सत्यप्रकाश दुबे, सावित्री देवी, राजेश कुमार साव, प्रो. मंटू दास, सुषमा कुमारी, फूलचंद राम, सुब्रतो साहा, चंदन भगत, अनुराधा भगत, स्वीटी महतो, कुसुम भगत, निसार अहमद, आसिफ अंसारी, चंदन चौधरी, राकेश कुमार सहित अनेक साहित्य और पुस्तक प्रेमी उपस्थित रहे।

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