कोलकाताः अंतरराष्ट्रीय पुस्तक मेले में हर साल की तरह इस बार भी रंग-बिरंगे और रचनात्मक स्टॉल पाठकों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं। इन्हीं के बीच मेले के गेट नंबर–1 के पास एक ऐसा अनोखा स्टॉल है, जो देखते ही मन मोह लेता है। यह कोई पारंपरिक स्टॉल नहीं, बल्कि एक चलता-फिरता पुस्तकालय है, जिसे साहित्य प्रेमी प्यार से ‘कविता गाड़ी’ कहते हैं।
यह कविता गाड़ी एक ठेला गाड़ी पर तैयार की गई है, जो पूरी तरह लकड़ी से बनी हुई है। गाड़ी के ऊपर एक छोटे से लकड़ी के घर जैसा ढांचा बनाया गया है और उसके चारों ओर बरामदे की तरह किताबें सजी हुई हैं। पूरा ढांचा किसी छोटे, आत्मीय घर का आभास कराता है। इसकी दीवारों पर की गई सुंदर चित्रकारी इस स्टॉल को और भी खास बनाती है। यह चित्रकला प्रसिद्ध चित्रशिल्पी अहाना बंदोपाध्याय की है, जिनका नाम स्टॉल पर स्पष्ट रूप से अंकित है।
‘कविता गाड़ी’ रोज़ाना शाम चार बजे से रात आठ बजे तक खास तौर पर जीवंत हो उठती है। इसी समय प्रसिद्ध बंगाली कवि सुबोध सरकार स्वयं यहां मौजूद रहते हैं। वे अपनी लिखी और संपादित पुस्तकों पर पाठकों के लिए हस्ताक्षर करते हैं। कविता प्रेमियों के लिए कवि से मिलना और उनकी किताब पर ऑटोग्राफ लेना इस स्टॉल का खास आकर्षण है।
सुबोध सरकार ने बताया कि वे पिछले 51 वर्षों से कविता लेखन में सक्रिय हैं। वर्ष 2013 में उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें गंगाधर मिहिर राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिल चुका है। वे अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों से भी जुड़े रहे हैं और कई वर्षों तक अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ आयोवा के इंटरनेशनल राइटिंग प्रोग्राम में भाग ले चुके हैं।
कवि ने बताया कि ‘कविता गाड़ी’ का नाम उनकी साहित्यिक पत्रिका ‘भाषा नगर’ से जुड़ा है, जिसका वे पिछले 35 वर्षों से संपादन कर रहे हैं। हर साल की तरह इस बार भी ‘कविता गाड़ी’ कोलकाता पुस्तक मेले में कविता और साहित्य प्रेमियों के लिए एक जीवंत केंद्र के रूप में उभरकर सामने आई है।