🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली में उपलब्ध सस्ती पुस्तकों से जन-जन तक विवेकानंद

विभिन्न भाषाएँ सीखने में रुचि रखते हैं, उनके लिए स्कूल ऑफ लैंग्वेज विभाग की जानकारी भी दी जाती है।

By रजनीश प्रसाद

Jan 29, 2026 13:00 IST

कोलकाता : विवेकानंद के विचारों को जन-जन तक पहुँचाने का प्रयास मेले में लगे विभिन्न स्टॉलों के बीच स्टॉल संख्या 266 विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यह स्टॉल रामकृष्ण मिशन, इंस्टीट्यूट ऑफ कल्चर द्वारा लगाया गया है जहाँ स्वामी विवेकानंद, श्रीरामकृष्ण परमहंस और माँ शारदा देवी के जीवन, दर्शन और शिक्षाओं से संबंधित पुस्तकों की विस्तृत श्रृंखला उपलब्ध है। स्टॉल लगाने का मुख्य उद्देश्य विवेकानंद के जीवन-दर्शन और उनके उपदेशों को पुस्तक रूप में आम जनता तक पहुँचाना है, ताकि लोग अपने जीवन में उनके विचारों को आत्मसात कर सकें।

यहाँ हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली- तीनों भाषाओं में पुस्तकें उपलब्ध हैं। स्टॉल पर मौजूद प्रतिनिधियों के अनुसार, अंग्रेजी और बंगाली पुस्तकों की बिक्री अपेक्षाकृत अधिक हो रही है जबकि हिंदी पुस्तकों की मांग थोड़ी कम है। इसका कारण यह बताया गया कि अधिकतर पाठक अंग्रेजी और बंगाली भाषी हैं। इसके बावजूद हिंदी पाठकों के लिए भी पर्याप्त सामग्री उपलब्ध कराई गई है।

आम लोगों तक किताबें सहज रूप से पहुँच सकें इसके लिए पुस्तकों की कीमतें बहुत कम रखी गई हैं और हर पुस्तक पर 10 प्रतिशत की छूट भी दी जा रही है। स्टॉल संचालकों का कहना है कि उनका मूल लक्ष्य लाभ कमाना नहीं बल्कि विवेकानंद के विचारों को घर-घर तक पहुँचाना है। इसी कारण मार्जिन भी न्यूनतम रखा गया है ताकि साधारण से साधारण व्यक्ति भी पुस्तकें खरीद सके।

इसके अतिरिक्त जो लोग विभिन्न भाषाएँ सीखने में रुचि रखते हैं, उनके लिए स्कूल ऑफ लैंग्वेज विभाग की जानकारी भी दी जाती है। हालाँकि प्रवेश प्रक्रिया, पाठ्यक्रम और समय-सारिणी की विस्तृत जानकारी संबंधित विभाग से ही प्राप्त की जा सकती है। इसके लिए इच्छुक लोगों को विभाग का संपर्क नंबर उपलब्ध कराया जाता है।

कुल मिलाकर, स्टॉल संख्या 266 न केवल पुस्तकों की बिक्री का केंद्र है बल्कि विवेकानंद के आदर्शों और जीवन-मूल्यों को समाज तक पहुँचाने का एक सशक्त माध्यम भी बनकर उभरा है।

Next Article
रिकॉर्ड 32 लाख पाठकों संख्या के साथ संपन्न हुआ कोलकाता पुस्तक मेला

Articles you may like: