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11 साल बाद अंतरराष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में लौटा चीन की किताबों का 'एग्जीबिशन'

चीनी संस्कृति और इतिहास की झलक बना पाठकों का आकर्षण।

By रजनीश प्रसाद

Jan 25, 2026 23:23 IST

कोलकाता : 49वें अंतर्राष्ट्रीय कोलकाता पुस्तक मेले में इस वर्ष एक बार फिर चीन की भागीदारी देखने को मिली, जिसने पाठकों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। इस स्टॉल पर मौजूद अधिकारी क्रिस्टीना ने बताया कि करीब 11 वर्षों के अंतराल के बाद चीन ने दोबारा पुस्तक मेले में अपना स्टॉल लगाया है।

कोविड महामारी और लॉकडाउन के कारण पिछले वर्षों में भागीदारी संभव नहीं हो पाई थी लेकिन इस बार फिर से स्टॉल लगाकर सांस्कृतिक और शैक्षणिक आदान-प्रदान की पहल की गई। उन्होंने बताया कि स्टॉल पर मौजूद सारी पुस्तकें प्रदर्शनी के लिए है। इसलिए इसे स्टॉल नहीं बल्कि प्रदर्शनी यानी एग्जीबिशन कहा जा रहा है। हम लोग एक गैर-लाभकारी संस्थान हैं। इसलिए यहां किसी भी प्रकार की पुस्तक बिक्री नहीं की जा रही है।

चीन के स्टॉल पर रखी गई सभी पुस्तकें और पत्रिकाएं केवल प्रदर्शनी के लिए हैं जिन पर स्पष्ट रूप से “Not for Sale” का टैग लगाया गया है। हालांकि जो पाठक और आगंतुक इन विषयों में रुचि रखते हैं उन्हें कुछ कॉम्प्लीमेंट्री किताबें और मैगजीन्स मुफ्त में प्रदान की जा रही हैं। ये पुस्तकें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध हैं।

स्टॉल पर रखी गई पुस्तकों में चीनी संस्कृति, भाषा और इतिहास से जुड़ी सामग्री के साथ-साथ एक महत्वपूर्ण पुस्तक भी शामिल है जो द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान चीन में सहायता के लिए गए इंडियन मेडिकल मिशन पर आधारित है। इसके अलावा इस विषय से जुड़ा वॉल्यूम-5 का नया संस्करण भी प्रदर्शनी में रखा गया है। कुछ पत्रिकाएं चीनी भाषा सीखने और पढ़ने की दृष्टि से भी उपयोगी बताई जा रही हैं।

इस वर्ष पुस्तक मेले में लगभग 21 देशों ने भाग लिया है, जिनमें अर्जेंटीना, फ्रांस, रूस, पेरू, जर्मनी और चीन प्रमुख हैं। इसके अलावा कोस्टा रिका, ग्वाटेमाला, नेपाल आदि देश भी शामिल रहे। चीन ने अंतिम क्षणों में मेले में भागीदारी का अनुरोध किया था जिसके कारण उन्हें अपेक्षाकृत छोटा स्टॉल उपलब्ध कराया गया।

स्टॉल पर मौजूद चीनी दूतावास के कर्मचारी पाठकों को पुस्तकों और संस्कृति की जानकारी हिंदी, अंग्रेजी और बंगाली भाषाओं में देने का प्रयास करते दिखे। यह स्टॉल न केवल पुस्तकों की प्रदर्शनी बल्कि सांस्कृतिक संवाद का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा।

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रिकॉर्ड 32 लाख पाठकों संख्या के साथ संपन्न हुआ कोलकाता पुस्तक मेला

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