🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

खड़गपुर में दिलीप घोष की वापसी? सीट आवंटन पर भाजपा में सस्पेंस

केंद्रीय चुनाव समिति तय करेगी टिकट, हिरण चटर्जी ने स्पष्ट किया अपना रुख।

By सायनी जोयारदार, Posted by: श्वेता सिंह

Jan 04, 2026 20:29 IST

खड़गपुर: पश्चिम बंगाल की राजनीति में खड़गपुर सदर सीट हमेशा से रणनीतिक महत्व रखती रही है। 2016 में जब भाजपा राज्य में लगभग अप्रभावी थी, तब दिलीप घोष ने खड़गपुर में पार्टी का झंडा गाड़ा और जीत हासिल की। उस समय उन्होंने जिले में अपनी मजबूत पैठ बनाई और पार्टी के लिए नए रास्ते खोले। 2019 में दिलीप ने मेदिनीपुर लोकसभा सीट से तृणमूल कांग्रेस के मानस भुइंया को परास्त किया और अपनी राजनीतिक पकड़ को और मजबूत किया।

अब दिलीप घोष फिर से खड़गपुर और मेदिनीपुर क्षेत्र में सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। वह लगातार जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं और प्रचार में बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं। हाल ही में दिलीप घोष ने कहा कि अगर पार्टी उन्हें खड़गपुर से चुनाव लड़ने के लिए कहती है तो वह तैयार हैं। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें वहां की जनता ने पहले ही दो बार जीत दिलाई है। इस बयान के बाद भाजपा में चर्चा तेज हो गई है कि क्या उन्हें फिर से खड़गपुर से चुनावी मैदान में उतारा जाएगा।

खड़गपुर के भाजपा विधायक हिरण चटर्जी ने कहा कि सीट आवंटन का अंतिम फैसला केंद्रीय चुनाव समिति करेगी, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा शामिल हैं। हिरण ने कहा, "वे लोग ही तय करते हैं कि किसे कहां से टिकट दिया जाएगा। 2021 में उस समिति ने मुझे खड़गपुर सदर से उम्मीदवार बनाया, 2022 में खड़गपुर नगर परिषद से खड़ा किया, 2024 में लोकसभा में घाटाल से चुनाव लड़वाया। अगर 2026 में वही समिति मुझे फिर खड़गपुर से चुनाव लड़वाती है, तो मैं चाहूंगा कि उस समय भी दिलीप बाबू अभी की तरह भाजपा और मेरे लिए प्रचार करें।"

हालांकि हिरण ने तंज के साथ कहा कि " दिलीप घोष ने मौजूदा सांसद होने के बावजूद दुर्गापुर भेजा जाने के फैसले को अनुचित बताया, तो मेरे मामले में भी यही न्याय लागू होता है या नहीं, मैं भी तो यहां का सिटिंग एमएलए हूं।" अब इसके बारे में भी दिलीप बाबू से ही पूछना उचित होगा।

विश्लेषकों के अनुसार, खड़गपुर सीट भाजपा के लिए रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। दिलीप की सक्रियता पार्टी के भीतर संतुलन पर असर डाल सकती है। सीट आवंटन पर केंद्रीय चुनाव समिति का अंतिम फैसला तय करेगा कि पार्टी किसे आगे बढ़ाती है। दिलीप की वापसी पार्टी को स्थानीय वोट बैंक मजबूत करने में मदद कर सकती है।

राजनीतिक विश्लेषण बताते हैं कि यदि दिलीप घोष को खड़गपुर से टिकट मिला तो पार्टी को उनके अनुभव और लोकप्रियता का फायदा मिलेगा। वहीं, हिरण और अन्य स्थानीय नेताओं की प्रतिक्रिया पार्टी के भीतर संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी। खड़गपुर की स्थिति केवल चुनावी रणनीति तक सीमित नहीं है बल्कि पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन और नेतृत्व की भूमिका पर भी असर डालेगी।

खड़गपुर अब भाजपा के लिए रणनीतिक और चुनावी दृष्टि से अहम केंद्र बन चुका है। दिलीप घोष की सक्रियता और हिरण की शर्तें यह दिखाती हैं कि सीट का अंतिम फैसला केंद्रीय चुनाव समिति के हाथ में है। आगामी विधानसभा चुनाव से पहले खड़गपुर की स्थिति पार्टी की रणनीति, स्थानीय संतुलन और चुनावी परिणाम तय करेगी।

मणिराज घोष

Prev Article
अमित शाह से मुलाकात के बाद दिलीप घोष सक्रिय, मिदनापुर में जनता के बीच लौटे नेता
Next Article
किस्मत इतनी खराब कि अमर्त्य सेन तक को SIR में सुनवाई का नोटिस भेजा गया : अभिषेक बनर्जी

Articles you may like: