कोलकाताः कोलकाता सहित पूरे दक्षिण बंगाल में मंगलवार की सुबह मानो ठंड की गिरफ्त में जकड़ी रही। घने कोहरे और कड़ाके की ठंडी हवा के बीच लोगों को घड़ी देखकर ही यह समझना पड़ा कि सुबह हो चुकी है। सूरज की गैरमौजूदगी ने ठंड का एहसास और तीखा कर दिया। हालात ऐसे रहे कि दोपहर साढ़े बारह बजे के बाद ही सूरज ने हल्की मौजूदगी दर्ज कराई, लेकिन तब तक ठंडी हवा का असर कम नहीं हुआ था।
दिन और रात, दोनों तापमान में रिकॉर्ड
मौसम विभाग के अनुसार, मंगलवार को कोलकाता का न्यूनतम तापमान 2013 के बाद सबसे निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जबकि दिन का अधिकतम तापमान भी रिकॉर्ड तोड़ते हुए 18 डिग्री सेल्सियस पर सिमट गया। पिछले तीन दशकों में जनवरी महीने के दौरान इससे कम अधिकतम तापमान केवल पांच बार ही दर्ज किया गया है। दिलचस्प यह है कि एक दिन पहले ही सोमवार को अधिकतम तापमान 18.4 डिग्री रहा था, जो बीते 30 वर्षों में नौवां सबसे कम था। महज 24 घंटे के भीतर दिन और रात-दोनों तापमानों का रिकॉर्ड बनना इस ठंड की गंभीरता को दर्शाता है।
पहले ही मिल चुका था कड़ी सर्दी का संकेत
दरअसल, इस कड़ाके की ठंड के संकेत मौसम विभाग ने कई महीने पहले दे दिए थे। सितंबर में ही बताया गया था कि ‘ला नीना’ की स्थिति के चलते इस बार देश में सर्दी सामान्य से अधिक कड़ी हो सकती है। हालांकि बंगाल में नवंबर और दिसंबर के शुरुआती सप्ताह तक ठंड नदारद रही और मौसम अपेक्षाकृत गर्म बना रहा। क्रिसमस के बाद तस्वीर पूरी तरह बदल गई। लगातार उत्तर-पश्चिमी ठंडी हवाओं ने पूरे राज्य को अपनी चपेट में ले लिया।
उत्तर भारत से बंगाल तक बना ‘फॉग कॉरिडोर’
पिछले करीब बारह दिनों से पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड होते हुए बंगाल तक घना कोहरा छाया हुआ है। इस पूरे इलाके में एक तरह का ‘फॉग कॉरिडोर’ बन गया है जिसके कारण कई जगहों पर सुबह ही नहीं बल्कि देर तक सूरज के दर्शन नहीं हो पा रहे हैं। नतीजतन दिन के तापमान में भी लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है और लोगों को सुबह की धूप सेंकने का मौका तक नहीं मिल पा रहा।
कई मौसमी कारण एक साथ जिम्मेदार
पुणे स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटियोरोलॉजी के वैज्ञानिकों का कहना है कि एक साथ कई मौसमी घटनाओं ने इस असामान्य स्थिति को जन्म दिया है। पहले से मौजूद ‘ला नीना’ प्रभाव के साथ उत्तर-पश्चिम भारत में बना पश्चिमी विक्षोभ अचानक हट गया, जिससे ठंडी हवा का रास्ता पूरी तरह खुल गया। इसके अलावा त्रिपुरा के ऊपर बने चक्रवातीय परिसंचरण ने ऊपरी वायुमंडल में बहने वाली बेहद ठंडी जेट स्ट्रीम को नीचे की ओर खींच लिया। इसका असर उत्तर भारत से लेकर दक्षिण बंगाल तक साफ महसूस किया जा रहा है।
इन जिलों में शीतल दिन और शीतलहर
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि बुधवार और गुरुवार को बीरभूम और पूर्व बर्धमान के कुछ हिस्सों में एक साथ ‘शीतल दिन’ और ‘शीतलहर’ की स्थिति बनी रह सकती है। इसके अलावा हुगली, मुर्शिदाबाद, नदिया, पश्चिम बर्धमान तथा उत्तर और दक्षिण 24 परगना जिलों में ‘शीतल दिन’ का प्रभाव देखने को मिलेगा। मौसम विज्ञान के अनुसार, जब किसी इलाके में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला जाए और सामान्य से कम से कम 4.5 डिग्री कम रहे, तो उसे शीतलहर कहा जाता है। वहीं, अधिकतम तापमान 10 डिग्री से नीचे रहने और सामान्य से 4.5 डिग्री कम होने की स्थिति को शीतल दिन माना जाता है।
सप्ताह के अंत में राहत की उम्मीद
हालांकि राहत की खबर यह है कि मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि सप्ताह के अंत से ठंड की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। तब तक लोगों को सलाह दी गई है कि वे ठंड से बचाव के पूरे इंतजाम रखें और विशेष रूप से सुबह व रात के समय सतर्क रहें।