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टेरर फंडिंग केस: शबीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में 13 जनवरी को सुनवाई

शबीर अहमद शाह ने दिल्ली हाईकोर्ट के 12 जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।

By रजनीश प्रसाद

Jan 07, 2026 19:36 IST

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह आतंक वित्तपोषण (टेरर फंडिंग) मामले में कश्मीरी अलगाववादी नेता शबीर अहमद शाह की जमानत याचिका पर 13 जनवरी को सुनवाई करेगा। यह मामला जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ के समक्ष सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।

सुनवाई के दौरान शबीर अहमद शाह की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कॉलिन गोंसाल्वेस ने दलीलें पेश करनी शुरू कीं। इसी बीच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने व्यक्तिगत कारणों से असुविधा जताई। उन्होंने अदालत को बताया कि गोंसाल्वेस को अपनी दलीलें रखने में समय लग सकता है। इस पर पीठ ने कहा कि आज समय की कमी है और मामले की सुनवाई अगले सप्ताह की जाएगी। इसके बाद अदालत ने याचिका को 13 जनवरी के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

शबीर अहमद शाह ने दिल्ली हाईकोर्ट के 12 जून 2024 के उस आदेश को चुनौती दी है जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था। एनआईए ने पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि इस मामले में गवाहों की जांच अभी जारी है। इससे पहले 4 सितंबर को शीर्ष अदालत ने शाह को अंतरिम जमानत देने से इनकार करते हुए एनआईए से जवाब मांगा था।

दिल्ली हाईकोर्ट ने जमानत खारिज करते हुए कहा था कि शबीर अहमद शाह द्वारा दोबारा इसी तरह की गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने और गवाहों को प्रभावित करने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। शाह को एनआईए ने 4 जून 2019 को गिरफ्तार किया था।

एनआईए के अनुसार वर्ष 2017 में 12 लोगों के खिलाफ पत्थरबाजी, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और केंद्र सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश के तहत धन जुटाने के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि शाह ने हवाला के जरिए धन प्राप्त कर और सीमा पार व्यापार के माध्यम से फंड जुटाकर जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी और आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई।

हाईकोर्ट ने यह भी नोट किया था कि शाह एक गैरकानूनी संगठन जम्मू-कश्मीर डेमोक्रेटिक फ्रीडम पार्टी के अध्यक्ष रहे हैं और उनके खिलाफ ऐसे 24 आपराधिक मामले लंबित हैं जो भारत से जम्मू-कश्मीर को अलग करने की साजिश से जुड़े हैं।

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