🔔 ताज़ा ख़बरें सबसे पहले!

Samachar EiSamay की ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, खेल, मनोरंजन और बिज़नेस अपडेट अब सीधे आपके पास।

‘मैंने सड़क से सभी कुत्तों को हटाने के लिए नहीं कहा…’-निर्देशों पर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्टता

कहां से हटाए जाएंगे आवारा कुत्ते? अदालत ने निर्देशों की सीमा स्पष्ट की

By एलिना दत्त, posted by डॉ. अभिज्ञात

Jan 08, 2026 16:05 IST

नयी दिल्लीः आवारा कुत्तों से जुड़े कई मामलों की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में चल रही है। इन्हीं मामलों से संबंधित अपने निर्देशों को गुरुवार को शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया। न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया के पीठ ने इस दिन आवारा कुत्तों, बिल्लियों और अन्य जानवरों से संबंधित याचिकाओं पर भी विचार किया। सड़क पर मौजूद बेसहारा जानवरों से उत्पन्न होने वाले संभावित खतरों की ओर भी अदालत का ध्यान दिलाया गया।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट की तीन न्यायाधीशों की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि अपने पहले के आदेश में सड़क से हर एक आवारा कुत्ते को हटाने की बात नहीं कही गई थी। आदेश केवल स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय जैसे शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को हटाने तक सीमित था।

इसके अलावा, शीर्ष अदालत ने सड़कों पर मौजूद जानवरों, विशेषकर कुत्तों के जन्म नियंत्रण पर जोर दिया। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों में सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुए डिवीजन बेंच ने सवाल किया कि अस्पताल के वार्डों में कुत्ते घूमते रहते हैं। क्या यह स्थिति जनस्वास्थ्य और मरीजों की सुरक्षा के लिए जोखिमपूर्ण नहीं है?

बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने देश में कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई थी और पशु जन्म नियंत्रण (ABC) कार्यक्रम को लागू करने में सरकार की विफलता पर नाराज़गी भी व्यक्त की थी। इस दौरान आवारा कुत्तों के साथ-साथ अन्य जानवरों का मुद्दा भी उठा। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने पूछा कि सुनवाई केवल आवारा कुत्तों तक ही क्यों सीमित है। “क्या अन्य जानवरों के जीवन का कोई मूल्य नहीं है? मुर्गियों और बकरियों के जीवन का क्या होगा? क्या उनके जीवन की कोई कीमत नहीं है?”

साथ ही अदालत ने स्पष्ट किया कि पहले से किसी कुत्ते के व्यवहार को देखकर यह समझ पाना संभव नहीं है कि वह कितना खतरनाक हो सकता है। अदालत ने कहा, “कोई भी जानवरों के मन को नहीं पढ़ सकता। कुत्ते कब काट लेंगे, यह कोई नहीं बता सकता। रोकथाम इलाज से बेहतर है।”

Prev Article
फर्जी सरकारी नौकरी घोटाले में ईडी की 6 राज्यों में 15 स्थानों पर छापेमारी
Next Article
ज़मीन के बदले नौकरी घोटाला मामलाः दिल्ली की अदालत ने लालू यादव परिवार के ख़िलाफ़ आरोप तय करने के निर्देश दिए

Articles you may like: