नई दिल्ली: राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने मंगलवार को अभियुक्त शुभम सिंह की ओर से दायर एक आवेदन को स्वीकार करते हुए निर्देश दिया कि अभियोजन पक्ष की पीड़िता की आवाज़ का नमूना लिया जाए और उसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा जाए ताकि मामले के रिकॉर्ड का हिस्सा बने विवादित ऑडियो और वीडियो रिकॉर्डिंग्स से उसका मिलान किया जा सके।
शुभम सिंह निलंबित भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के करीबी सहयोगी शशि सिंह का पुत्र है। वह उन्नाव बलात्कार पीड़िता के कथित सामूहिक बलात्कार से जुड़े एक अलग मामले में अभियुक्त है।
यह आवेदन बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता अखंड प्रताप सिंह द्वारा दायर किया गया, जिनके साथ अधिवक्ता समृद्धि दोभाल और हृतविक मौर्य भी शुभम सिंह की ओर से पेश हुए। आवेदन में पीड़िता की वैज्ञानिक तरीके से आवाज़ का नमूना लेने और केंद्रीय फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला द्वारा उसकी तुलना कराने की मांग की गई थी। दलील दी गई कि पीड़िता ने रिकॉर्ड की गई बातचीत में मौजूद आवाज़ को अपनी आवाज़ मानने से इनकार किया है, जबकि ये रिकॉर्डिंग्स मुकदमे के दौरान भरोसा किए गए मामले के साक्ष्य का हिस्सा हैं।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि इन रिकॉर्डिंग्स में ऐसे बयान हैं जिनमें पीड़िता ने कथित तौर पर यह स्वीकार किया है कि वह अपनी मर्जी से घर से गई थी। यह भी कहा गया कि पीड़िता की गवाही की विश्वसनीयता परखने के लिए फॉरेंसिक आवाज़ विश्लेषण आवश्यक है और इस तरह की वैज्ञानिक जांच से इनकार करना अदालत को महत्वपूर्ण और वस्तुनिष्ठ साक्ष्य से वंचित कर देगा। खासकर तब जब ये रिकॉर्डिंग्स अभियुक्त के पक्ष में सहायक हो सकती हैं। मामले में एक अन्य अभियुक्त नरेश तिवारी की ओर से अधिवक्ता हेमंत शाह भी उपस्थित हुए।
आरोपी के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार पर जोर देते हुए अधिवक्ता सिंह ने दलील दी कि CFSL द्वारा विशेषज्ञ स्तर का वॉयस स्पेक्ट्रोग्राफिक विश्लेषण आवश्यक है ताकि विवादित रिकॉर्डिंग्स की प्रामाणिकता की स्वतंत्र रूप से वैज्ञानिक माध्यमों से पुष्टि की जा सके। आवाज़ के नमूने और फॉरेंसिक तुलना से संबंधित कानूनी स्थिति तथा प्रासंगिक न्यायिक मिसालों पर विचार करने के बाद राउज़ एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) मुरारी प्रसाद सिंह ने कहा कि वैज्ञानिक जांच की अनुमति देने से सत्य की खोज की प्रक्रिया में सहायता मिलेगी और इससे अभियोजन पक्ष को कोई पूर्वाग्रह नहीं होगा। तदनुसार, अदालत ने निर्देश दिया कि पीड़िता की आवाज़ का नमूना कानून के अनुसार सख्ती से एकत्र किया जाए और संदिग्ध ऑडियो व वीडियो रिकॉर्डिंग्स से तुलना के लिए CFSL को भेजा जाए।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यह फॉरेंसिक प्रक्रिया केवल न्यायनिर्णयन की प्रक्रिया में सहायता के लिए अनुमति दी जा रही है और विशेषज्ञ रिपोर्ट के साक्ष्यात्मक मूल्य का आकलन मुकदमे के उपयुक्त चरण पर किया जाएगा।