घर का मालिक दिहाड़ी मजदूर और परिवार की महिलाएं घर चलाने के लिए बीड़ी बांधने का काम करती है। ऐसा परिवार जहां आर्थिक तंगी में दिन गुजारना बहुत ही सामान्य सी बात है। वहां बिजली का बिल आया है ₹40 हजार। आवास योजना के तहत जिस परिवार को अपने सिर पर छत मिली है वहां 3 महीने की बिजली का बिल आया है ₹25 हजार।
ऐसा एक या दो नहीं बल्कि गांव के कम से कम 20 से अधिक BPL परिवारों के साथ हुआ है जहां बिजली का अवास्तविक बिल भेजने का आरोप लगाया गया है। राज्य की मंत्री सबिना यास्मीन के केंद्र माथाबाड़ी थाना के भागलपुर गांव में आए बिजली के बिल को लेकर स्थानीय निवासी सिर पकड़ कर बैठ गए हैं।
मेघनाथ सरकार नामक एक ग्राहक ने इस मामले में जिलाधिकारी के पास लिखित शिकायत भी दर्ज करवायी है। बिजली का वितरण करने वाली कंपनी के मालदह क्षेत्रीय मैनेजर सौमेन दास ने इस मामले में जल्द-जल्द आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
रथबाड़ी ग्राम पंचायत के भागलपुर इलाके के अधिकांश परिवार ही BPL सूची में शामिल हैं। किसी समय गांव के 50 परिवारों को राज्य सरकार ने मुफ्त में बिजली देने की व्यवस्था की थी लेकिन इसमें से 20 से अधिक परिवारों को 25 से 40 हजार रुपए का बिजली का बिल भेजा गया है। गांव के निवासी और पेशे से दिहाड़ी मजदूर कैलाश सरकार का कहना है कि किसी तरह से एक जून की रोटी का इंतजाम कर पाता हूं।
घर पर एक साथ में 3 महीनों का बिजली का बिल 25 हजार रुपया भेज दिया गया है। इतना रुपया कहां से लाऊंगा? इसी गांव के एक और दिहाड़ी मजदूर मेघनाथ सरकार का कहना है कि घर में फ्रिज नहीं है, पानी का मोटर नहीं है। सिर्फ 2 बल्ब और गर्मी के मौसम में एक पंखा चलता है। एक टीवी है। इसके लिए 40-50 हजार रुपए का बिल भेज दिया गया है।
पूरी घटना की जानकारी मंत्री सबिना को दी गयी है। पंचायत सदस्य बाबु सरकार ने इस बारे में कहा कि जिन लोगों की गलती की वजह से मेहनत मजदूरी करने वाले लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है ऐसे कर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मंत्री ने कहा कि मुझे इस घटना की जानकारी मिली है। ऐसी घटनाओं को बर्दास्त नहीं किया जाएगा। इस बारे में बिजली विभाग, मालदह के कर्मचारियों को सूचित किया गया है। उन्होंने मामले की जांच करने का आश्वासन दिया है।