दत्ताबाद के स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या के अपहरण और हत्या के मुख्य आरोपी उत्तर बंगाल के राजगंज के BDO प्रशांत बर्मन को सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा था। कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा दिए गए 72 घंटों में आत्मसमर्पण के आदेश को चुनौती देते हुए प्रशांत बर्मन ने सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए आवेदन किया था।
लेकिन सोमवार को सुप्रीम कोर्ट से उन्हें तब जोरदार झटका लगा जब अग्रिम जमानत की याचिका को खारिज करते हुए 23 जनवरी 2026 तक उन्हें आत्मसमर्पण का आदेश दिया गया। अब मंगलवार को प्रशांत बर्मन को एक बार फिर से झटका लगा है।
सुप्रीम कोर्ट द्वारा आत्मसमर्पण करने का आदेश देने के 24 घंटे के अंदर प्रशांत बर्मन को BDO के पद से हटा दिया गया है। इसके साथ राजगंज के संयुक्त BDO सौरभकांति मंडल को जिम्मेदारी सौंप दी गयी है। BDO पद की जिम्मेदारी मिलने के बाद सौरभकांति मंडल ने कहा कि पिछले काफी समय से कई कार्य रुके पड़े थे। उन रुके हुए कामों को शुरू करना ही मेरी प्राथमिकता होगी।
गौरतलब है कि गत 28 अक्तूबर को सॉल्टलेक के दत्ताबाद में स्वर्ण व्यवसायी स्वपन कामिल्या के अपहरण का मामला सामने आया था। 29 अक्तूबर को बागजोला खाल के किनारे से सटे यात्रागाछी से स्वपन कामिल्या का क्षत-विक्षत शव बरामद किया गया था। इसके बाद परिवार की ओर से विधाननगर दक्षिण थाना में स्वर्ण व्यवसायी के अपहरण और हत्या का मामला दायर किया गया।
उनका आरोप था कि इस मामले में राजगंज के BDO प्रशांत बर्मन शामिल थे। आरोप लगाया गया कि प्रशांत बर्मन के उत्तर बंगाल वाले घर से चोरी हुए गहनों को स्वपन कामिल्या ने खरीदा था। इस संदेह में उनका अपहरण और पिटाई की गयी।
दावा किया जा रहा है कि कलकत्ता हाई कोर्ट ने जब से प्रशांत बर्मन की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है, उसके बाद से ही वह 'गायब' हो चुके हैं।