लक्ष्मी भंडार परियोजना को लेकर भाजपा की ही विडंबना को बढ़ा रहा है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने इस परियोजना के बारे में जो बात कही, प्रदेश भाजपा के नेता इसका ठीक उल्टा कह रहे हैं। स्वाभाविक रूप से तृणमूल को इस वजह से विरोधी खेमे पर निशाना साधने का मौका मिल गया है।
गत मंगलवार (30 दिसंबर) को न्यू टाउन में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए अमित शाह ने खुले तौर पर कहा कि अगर 2026 के चुनाव में पश्चिम बंगाल में भाजपा सत्ता में आती है तो ममता बनर्जी के समय में शुरू की गयी परियोजनाओं को जारी रखा जाएगा। लेकिन...
शाही वादे के खिलाफ जाकर तृणमूल के 15 साल के लंबे समय के दौरान शुरू की गयी परियोजनाओं के बारे में पश्चिम मिदनापुर के भाजपा नेता कालीपद सेनगुप्ता ने अपनी बात कही। शनिवार को जिले के दासपुर में भाजपा की एक सभा को संबोधित करते हुए कालीपद सेनगुप्ता के भाषण का एक वीडियो रविवार को तृणमूल के आधिकारिक X हैंडल पर पोस्ट किया गया।
इस वीडियो में कालीपद सेनगुप्ता कहते हुए सुनाई दे रहे हैं, 'अभी भी ऐसी माताएं हैं जिन्हें लक्ष्मी भंडार का रुपया मिलता है, वे तृणमूल को वोट देती हैं। वे तृणमूल को ही वोट देने जाएंगी। मैं उन सभी परिवारों के पतियों से कहता हूं कि उन माताओं को घरों में बंद रखे। उन्हें कमल के फूल छाप पर वोट देना है, तृणमूल को नहीं।' हालांकि समाचार एई समय ने इस वीडियो की सत्यता की पुष्टि नहीं की है।
वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले कूचबिहार की भाजपा नेता दीपा चक्रवर्ती ने कहा था कि अगर भाजपा राज्य में सत्ता में आई तो लक्ष्मी भंडार बंद कर दिया जाएगा। दीपा की इस घोषणा ने भी भगवा खेमे में खलबली मचा दी थी। तृणमूल ने दीपा के इस बयान को अपने प्रचार अभियान में हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था। अब साल 2026 के विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले कालीपद सेनगुप्ता के बयान ने तृणमूल को एक नया हथियार दे दिया है।
तृणमूल के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को अपने आधिकारिक X हैंडल पर भाजपा नेता के भाषण का एक वीडियो पोस्ट किया और प्रदेश भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने लिखा, 'पहला कदम चुनाव आयोग को हाईजैक करना और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के माध्यम से वैध मतदाताओं के नाम हटाना था। यह कोशिश सफल नहीं हुई तो दूसरा कदम 'युक्तिसंगत असंगति' ढूंढकर वोटर लिस्ट से नाम हटाना था। जब वह भी फ्लॉप हो गयी तो सामंतवादी और पुरुष-प्रधान बर्बरता का रास्ता चुन लिया गया है। पतियों से कहा जा रहा है कि वे अपनी पत्नियों को घरों में बंद रखें ताकि उनकी पत्नियां, जिनके पास लक्ष्मी भंडार का रुपया जाता है, वोट न दे सकें।"
अभिषेक बनर्जी ने अपने पोस्ट में दीपा चक्रवर्ती की दो साल पहले के बयान का भी ज़िक्र किया। उन्होंने लिखा है कि भाजपा ने पहले ही धमकी दी थी कि अगर वह सत्ता में आई तो लक्ष्मी भंडार बंद कर देगी। महिलाओं को दी जाने वाली इस वित्तिय मदद को भीख कहा गया था। अब वह महिलाओं के मताधिकार को खत्म करने की धमकी दे रही है। क्या यह इसलिए किया जा रहा है क्योंकि महिलाओं के वोट भाजपा के खिलाफ जाएंगे?
जिन महिलाओं को कैद करना चाहते हैं वहीं 2026 के विधानसभा चुनावों में बूथ-बूथ जाएंगी और इस 'बंगाल विरोधी', 'महिला विरोधी' राजनीति को हमेशा के लिए खत्म कर देंगी। उनका कहना है कि दासपुर में भाजपा की बैठक में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार भी मौजूद थे। हालांकि बालुरघाट के सांसद मजूमदार ने अपनी सफाई में कहा, 'उन्होंने मेरे सामने यह नहीं कहा था। मैं तब स्टेज पर नहीं था। मैं इस बारे में कुछ नहीं कह सकता।' हालांकि उन्होंने यह जरूर कहा कि अगर भाजपा सत्ता में आती है तो तृणमूल से ज्यादा रुपए माताओं और बहनों को दिए जाएंगे।
प्रदेश भाजपा के किसी भी बड़े नेता ने कालीपद सेनगुप्ता का सार्वजनिक तौर पर बचाव नहीं किया लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाएगी ऐसा कोई इशारा भी नहीं मिला है। तृणमूल का आरोप है कि भाजपा ने पहले दीपा चक्रवर्ती के खिलाफ भी कोई कार्रवाई नहीं की थी।
भाजपा के इस रुख से तृणमूल नेता चंद्रिमा भट्टाचार्य, शशि पांजा समेत तृणमूल की महिला ब्रिगेड ने भाजपा के 'महिला विरोधी' रवैये पर खुलकर बात की है। शशि पांजा ने कहा कि भाजपा महिला विरोधी है। यह कालीपद भाजपा की राज्य कमेटी के सदस्य हैं तो क्या भाजपा की स्टेट कमेटी का यही रवैया है? भाजपा महिलाओं के लिए कोई परियोजना नहीं चाहती है।
पांजा का आरोप है कि कालीपद के बाद जब सुकांत मजूमदार ने भाषण दिया तब उन्होंने भी इस बयान में कोई सुधार नहीं किया। इसका मतलब है कि केंद्रीय राज्य मंत्री इस बयान का समर्थन कर रहे हैं। वहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य ने कहा कि बंगाल की लक्ष्मी ही इसका जवाब देंगी। बंगाल की लड़कियां जवाब देने के लिए तैयार हैं।
तृणमूल के शीर्ष नेताओं का मानना है कि प्रदेश भाजपा कभी भी लक्ष्मी भंडार परियोजना को लेकर अपना रुख स्पष्ट नहीं कर पायी है। इस परियोजना से राज्य की 2 करोड़ से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हुई हैं। लक्ष्मी भंडार से मिलने वाले रुपए का इस्तेमाल महिलाएं अलग-अलग कामों के लिए करती हैं। इन महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा तृणमूल का समर्थन भी करता है।
महिला ब्रिगेड द्वारा तृणमूल को मिलने वाले इस समर्थन के दम से भी भगवा खेमा टूट नहीं पाया। इसलिए कभी शुभेंदु अधिकारी तो कभी सुकांत मजूमदार ने भाजपा के सत्ता में आने के बाद महिलाओं को ज्यादा रुपए देने का वादा किया।
Here’s @BJP4India’s Bangla-Birodhi toolkit:
— Abhishek Banerjee (@abhishekaitc) January 4, 2026
???? Step 1: Hijack the Election Commission to conduct SIR, deleting legitimate voters en masse.
???? Step 2: When that backfired, invent the “logical discrepancies” farce to forcibly erase names.
???? Step 3: When even that flopped,… pic.twitter.com/LGPIQnhMSS