पश्चिम बंगाल विधानसभा की मियाद 5 मई को खत्म हो रही है। उससे पहले अप्रैल के अंतिम सप्ताह तक राज्य विधानसभा चुनाव सम्पन्न कर लेना होगा। वहीं दूसरी ओर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की जाएगी। उससे पहले चुनाव आयोग (EC) ने राज्य विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी है।
सोमवार को आयोग ने दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारी और पश्चिम बंगाल के चीफ इलेक्शन ऑफिसर (CEO) मनोज अग्रवाल के साथ विधानसभा चुनाव में सुरक्षा के मुद्दे पर बैठक की। इस बैठक में राज्य पुलिस के नोडल ऑफिसर आनंद कुमार भी शामिल हुए। बंगाल के अलावा अगले साल तमिलनाडु, केरल, असम और पुडुचेरी में भी विधानसभा चुनाव होने हैं।
समय भले ही कितना भी बदल गया हो लेकिन बंगाल में चुनाव की तस्वीर नहीं बदली है। पश्चिम बंगाल में चुनाव का मतलब ही हिंसा और खून-खराबा रहा है। सिर्फ मतदान वाले दिन ही नहीं बल्कि चुनाव के बाद होने वाली हिंसा भी चुनाव आयोग को परेशान कर रही है। इसलिए आयोग शुरुआत से ही हिंसा से सख्ती से निपटने का ब्लूप्रिंट तैयार करना चाहती है।
आयोग के अधिकारियों का मानना है कि पहले बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में चुनाव के दौरान हिंसा, जान-माल का नुकसान और खून-खराबा आम बात हुआ करती थी। अब हिंसा को रोककर चुनाव को लोकतंत्र का महापर्व बना दिया जा सका है। लेकिन बंगाल में यह स्थिति नहीं बदल पा रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसलिए राज्य के CEO ने बैठक में विधानसभा चुनाव-2026 के लिए केंद्रीय वाहिनी की संख्या बढ़ाने और चुनाव को कम चरणों में करने का प्रस्ताव रखा है।
बता दें, साल 2021 में विधानसभा चुनाव 7 चरणों में करवाए गए थे। बंगाल में पिछला लोकसभा चुनाव भी 7 चरणों में ही हुआ था लेकिन इस बार CEO ऑफिस महज 2 से 3 चरणों में विधानसभा चुनाव को करवाने की बात कह रहा है। सूत्रों का दावा है कि इसके लिए ज्यादा संख्या में सेंट्रल फोर्स की मांग की गई हैं।
हालांकि सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि आखिरकार राज्य को कितनी फोर्स और कितने पुलिस ऑफिसर मिलते हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की बैठक में यह तय किया गया है कि राज्य पुलिस चुनाव के लिए अधिकतम 35,000 कर्मचारियों को दे सकती है। चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान काले धन के बहाव को रोकने के लिए आयोग शुरू से ही केंद्र और राज्य की अलग-अलग सुरक्षा एजेंसियों के बीच तकनीक का इस्तेमाल कर समन्वय बनाने और नाका चेकिंग पर भी जोर दे रहा है। इसी वजह से नाका चेकिंग के दौरान वेबकास्टिंग को अनिवार्य करने का प्रस्ताव दिया गया है।
बता दें, साल 2024 के लोकसभा चुनाव में 1 मार्च से 13 अप्रैल के बीच पश्चिम बंगाल से 219 करोड़ रुपये की शराब और ड्रग्स बरामद हुए थे। इसके साथ ही नगद 13 करोड़ रुपये भी जब्त हुए थे जिसका कोई हिसाब नहीं मिल सका था।
आयोग सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बैठक में CEO ने राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर एक रिपोर्ट भी दी। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले चुनावों में कितनी केंद्रीय वाहिनी को तैनात की गई थीं और राज्य पुलिस की कितनी फोर्स हैं। गौरतलब है कि पिछली लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में केंद्रीय वाहिनी की 1,094 कंपनियां तैनात की गई थीं। वहीं पिछली राज्य विधानसभा चुनाव में केंद्रीय वाहिनी की 1,100 से ज्यादा कंपनियां राज्य को मिली थीं।