नए साल के शुरुआती 2 दिनों में तापमान में थोड़ी वृद्धि दर्ज हुई थी जिसके बाद लोगों ने सोचा था कि शायद कोलकाता से अब सर्दियां विदा हो रही हैं। लेकिन...शनिवार (3 जनवरी) से तेज उत्तरी हवाओं ने जैसे ही पारी संभाली मौसम भी पूरी तरह से बदल गया। उत्तरी हवाओं के प्रभाव से अब कोलकाता समेत राज्य के बड़े हिस्से में शीतलहर जैसी स्थिति देखने को मिल रही है।
मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिलों से लेकर शहरी इलाकों तक में रातों-रात तापमान में गिरावट दर्ज की गयी है। लेकिन कब तक चलेगा यह शीतलहर? क्या कहता है मौसम विभाग?
कैसा है कोलकाता का हाल?
रविवार की तरह ही सोमवार को भी कोलकाता के आसमान में बादलों ने अपना डेरा डाल कर रखा है। आसमान के साफ नहीं होने की वजह से सूरज या धूप भी नहीं खिल रही जिस कारण ठंड और भी अधिक महसूस हो रही है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार रविवार को कोलकाता का न्यूनतम तापमान 15.2 डिग्री सेल्सियस रहा।
वहीं सोमवार को एक ही झटके में तापमान 12.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है जो सामान्य से करीब 2 डिग्री सेल्सियस कम बताया जाता है। मौसम विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आसमान में बादलों के छाए रहने की वजह से धूप नहीं खिलेगी और उत्तरी हवाओं के प्रभाव से कंपकंपी महसूस होगी।
उत्तर और दक्षिण बंगाल में भी जमकर पड़ रही ठंड
सिर्फ कोलकाता ही नहीं बल्कि दक्षिण और उत्तर बंगाल के जिलों में भी जमकर ठंड पड़ रही है। मौसम विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक दक्षिण बंगाल में सबसे कम तापमान कृष्णनगर में दर्ज किया गया जहां पारा लुढ़ककर 9 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। वहीं बात अगर उत्तर बंगाल की करें तो यहां दार्जिलिंग का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका है।
ऊंचे पर्वतीय इलाकों में सबसे ज्यादा ठंड महसूस हो रही हैं जिनमें मानेभंजन, सन्दकफू और धोत्रे आदि इलाके शामिल हैं। यहां तापमान शून्य से 3 से 5 डिग्री नीचे बना हुआ है। बांकुड़ा और पुरुलिया में भी रात के समय तापमान 6 से 8 डिग्री सेल्सियस के आसपास ही रह रहा है।
कब तक चलेगी शीतलहर?
बताया जाता है कि अभी ठंड का प्रभाव कम होने की संभावना नजर नहीं आ रही है। 10 जनवरी तक राज्य में शीत लहर का प्रभाव बना रहेगा जिसकी वजह से सूर्यास्त के बाद ही जबरदस्त ठंड महसूस होगी। विशेषज्ञों ने बहुत जरूरी न होने पर घर से बाहर न निकलने की सलाह दी है।
आज, 5 जनवरी को सन्दकफू, घूम, धोत्रे और चटकपुर समेत ऊंचे पर्वतीय इलाकों में बर्फबारी होने की पूरी संभावना जतायी जा रही है। इस वजह से पर्यटकों से भी खास सावधानी बरतने की सलाह दी गयी है क्योंकि बर्फबारी होने पर फिसलन पैदा होती है। इस वजह से गाड़ियों के आपस में टकराने या फिसलकर खाई में गिरने की आशंका भी बढ़ जाती है।