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आखिर क्यों कोलकाता में पड़ रही है रिकॉर्ड तोड़ ठंडी? कहीं वजह ला-नीना तो नहीं! जानिए क्या है यह

आखिर क्यों कोलकाता में इतनी कड़ाके की ठंड पड़ रही है? क्या ला-नीना (La Nina) के प्रभाव से ही इस साल सर्दियों में कोलकाता कंपकंपा रही है?

By Moumita Bhattacharya

Jan 06, 2026 17:23 IST

पिछले कुछ दिनों से कोलकाता में पड़ रही कड़ाके की ठंड ने अपने ही रिकॉर्ड्स ध्वस्त कर दिए हैं। अलीपुर मौसम विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सोमवार की सुबह कोलकाता का न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 10.2 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच चुका था। बताया जाता है कि 72 घंटों के दौरान कोलकाता का तापमान 5 डिग्री तक नीचे चला गया है।

शुक्रवार की रात को जहां तापमान बढ़कर 14.2 डिग्री सेल्सियस हो गया था, वहीं सोमवार की रात को तापमान का पारा 10 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया। आखिर क्यों कोलकाता में इतनी कड़ाके की ठंड पड़ रही है? क्या ला-नीना (La Nina) के प्रभाव से ही इस साल सर्दियों में कोलकाता कंपकंपा रही है? क्या है ला-नीना?

ला नीना की वजह से रिकॉर्ड तोड़ सर्दी

मौसम विशेषज्ञों ने कुछ समय पहले ही इस बात की घोषणा कर दी थी कि ला-नीना के प्रभाव से इस साल कड़ाके की ठंड पड़ेगी। मौसम विशेषज्ञों का कहना था कि दिसंबर से फरवरी तक कड़ाके की ठंड पड़ेगी। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रशांत महासागर में ला-नीना के प्रभाव की वजह से ही इस साल कड़ाके की ठंड पड़ेगी।

पर ला-नीना प्रभाव है क्या जिसकी वजह से रिकॉर्ड तोड़ ठंड पड़ रही है और प्रशांत महासागर में बन रहे ला-नीना प्रभाव के प्रभाव की वजह से क्यों बंगाल में ठंड पड़ रही है? चलिए समझने की कोशिश करते हैं...

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क्या है ला-नीना प्रभाव?

अल-नीनो का असर जब अपने चरम पर पहुंच जाता है तो उसे ला-नीना कहा जाता है। यह हवाओं का एक बहाव होता है जो ऑस्ट्रेलिया और एशिया की तरफ चलती है। जब हवाओं का प्रवाह पहले की तुलना में तेज हो जाता है तब उसे अल-नीनो या ला-नीना कहा जाता है। इसमें दक्षिण अमेरिका के तटवर्तीय इलाकों में समुद्र का ठंडा पानी तेजी के साथ तल से ऊपर की ओर से आता है।

वहीं समुद्र की सतह पर मौजूद गर्म पानी तेज हवाओं के झोंकों के साथ ऑस्ट्रेलिया और एशियाई देशों की ओर बढ़ने लगती है। इस वजह से भारी बारिश होती है। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि अल नीनो की तुलना में ला नीना का चक्र थोड़ा लंबा होता है। बताया जाता है कि यह एक से 4 सालों तक चल सकता है।

मौसम में क्या पड़ता है असर?

सीधे और सरल शब्दों में अगर समझा जाए तो कहा जा सकता है कि ला-नीना के प्रभाव से प्रशांत महासागर के ऊपरी स्तर का पानी सामान्य से ज्यादा ठंडा हो जाता है। इसका असर ही दुनिया भर के मौसम पर पड़ता है। ला-नीना के प्रभाव से ही भारत में तेज मानसून और भारी वर्षा होती है।

इसके अलावा तापमान भी सामान्य से ज्यादा नीचे जाती है जिसकी वजह से कड़ाके की ठंड पड़ती है। काफी महीनों पहले ही मौसम विशेषज्ञों ने इस बात की भविष्यवाणी कर दी थी कि भारत समेत एशिया के अधिकांश देशों में कड़ाके की ठंड पड़ने की संभावना है।

मौसम वैज्ञानिकों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जलवायु परिवर्तन की वजह से अब ला-नीना और अल-नीनो जैसी घटनाएं पहले के मुकाबले ज्यादा तेजी के साथ हो रही है।

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