हावड़ा: भूकंप के कारण हावड़ा शहर में दहशत फैल गई है। खासकर शहर की विभिन्न बहुमंजिला इमारतों और पुराने जर्जर मकानों को लेकर लोगों की चिंता बढ़ रही है। सवाल उठ रहा है कि भूकंप में हावड़ा की कौन-कौन सी इमारतें प्रभावित हुईं। प्रशासन की ओर से बड़े नुकसान की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। हालांकि कुछ इलाकों में दीवारों में दरार और प्लास्टर गिरने की शिकायत सामने आई है।
शहर के पिलखाना, कदमतला, शिवपुर, लिलुआ सहित कई इलाकों के स्थानीय लोगों का कहना है कि पिलखाना बस्ती क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में जिस तरह एक के बाद एक बहुमंजिला इमारतें बनी हैं, वह चिंता का विषय है। आरोप है कि कई मामलों में निर्माण नियमों का पालन नहीं किया गया और मजबूत नींव या मानक सामग्री का उपयोग नहीं हुआ।
पिलखाना के निवासी मोहम्मद सलीम ने बताया कि भूकंप के समय पूरा घर हिल रहा था। हम बहुत डर गए थे। डर के कारण सभी बाहर निकल आए। यह घर सही तरीके से बना था या नहीं, हमें पता नहीं। एक अन्य निवासी रीना दास ने कहा कि मकान मालिकों ने जल्दी-जल्दी बहुमंजिला इमारतें बना दीं लेकिन सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया। अब हल्का सा झटका भी लगता है तो लगता है कि घर गिर जाएगा। सिर्फ नई इमारतें ही नहीं, हावड़ा के कई पुराने मकान भी खतरनाक स्थिति में हैं। शहर के पुराने हिस्सों में सैकड़ों साल पुराने घरों की हालत और भी खराब है। कई मकानों की बालकनी झुक गई है और छत का प्लास्टर गिर रहा है। कदमतला के निवासी सुभाष मुखोपाध्याय ने कहा कि हमारा घर लगभग 80 साल पुराना है। भूकंप के बाद रात में सोने में डर लगता है। अगर दोबारा ऐसा हुआ तो दीवार गिर सकती है।
शहरी योजनाकारों के अनुसार, भूकंप संभावित क्षेत्रों में निर्माण के लिए निर्धारित मानकों का पालन अनिवार्य है लेकिन तेज शहरीकरण के दबाव में कई जगह इन नियमों की अनदेखी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप-रोधी डिजाइन और गुणवत्तापूर्ण सामग्री का उपयोग न होने पर मध्यम तीव्रता के झटकों में भी बड़ी दुर्घटना हो सकती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कई अवैध निर्माणों के खिलाफ उचित निगरानी नहीं हुई। एक समाजसेवी ने कहा कि बार-बार शिकायत के बावजूद अवैध निर्माण नहीं रुका। अब भूकंप के बाद लोग डर के साये में जी रहे हैं।
प्रशासन ने कहा है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और प्रभावित मकानों के संबंध में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। हालांकि लोगों का कहना है कि सिर्फ आश्वासन नहीं, ठोस कार्रवाई की जरूरत है। जोखिम वाले भवनों की सूची बनाकर जल्द कदम उठाए जाने चाहिए। भूकंप की पुनरावृत्ति ने शहरवासियों के मन में अनजाना भय पैदा कर दिया है। खासकर घनी आबादी वाले क्षेत्रों में, जहां संकरी सड़कें और अव्यवस्थित निर्माण है, वहां बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। हावड़ा शहर के निवासियों का एक ही सवाल है कि सुरक्षित आवास की गारंटी कब मिलेगी। प्रशासनिक निगरानी और जागरूक निर्माण ही इस डर को कम कर सकते हैं। तब तक भूकंप का हर झटका शहर की कमजोर हकीकत की याद दिलाता रहेगा।