चेन्नई : तमिलनाडु की राजनीति में चुनाव परिणाम के बाद सरकार गठन को लेकर तेज हलचल शुरू हो गई है। अभिनेता-राजनेता थलापति विजय की पार्टी तमिलागा वेत्रि कझगम सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है लेकिन बहुमत से अभी भी दूर है। ऐसे में सरकार बनाने के लिए गठबंधन की राजनीति निर्णायक भूमिका निभा रही है।
बुधवार को कांग्रेस पार्टी ने आधिकारिक पत्र जारी कर विजय की पार्टी को समर्थन देने का ऐलान किया। इसके साथ ही 55 साल पुराना डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन टूट गया। इस फैसले ने राज्य की राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल दी है। हालांकि कांग्रेस ने समर्थन के बदले शर्त रखी है कि उसके दो विधायकों को मंत्रिमंडल में जगह दी जाए।
234 सदस्यीय विधानसभा में TVK को 108 सीटें मिली थीं लेकिन एक सीट कम होकर संख्या 107 रह जाएगी। सरकार बनाने के लिए 118 विधायकों का समर्थन जरूरी है। कांग्रेस के समर्थन के बाद गठबंधन की संख्या बढ़कर 113 तक पहुंच गई है फिर भी बहुमत से 5 सीटें कम हैं।
अब बाकी विधायकों की कमी पूरी करने के लिए विजय की नजर छोटे दलों पर है। सूत्रों के अनुसार सीपीआई, सीपीएम और वीसीके जैसे दलों से संपर्क किया जा रहा है जिनके पास कुछ सीटें हैं।
इस पूरे समीकरण में एआईएडीएमके की भूमिका अहम मानी जा रही है। बताया जा रहा है कि TVK ने उससे भी संपर्क साधा है लेकिन यह रास्ता आसान नहीं है। AIADMK के भीतर इस मुद्दे पर मतभेद हैं। वहीं कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि अगर AIADMK को साथ लिया गया तो वह अपना समर्थन वापस ले सकती है।
दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी से समर्थन लेने के विकल्प को TVK ने वैचारिक कारणों से लगभग खारिज कर दिया है। ऐसे में विजय के सामने दो ही रास्ते बचे हैं या तो AIADMK से समझौता करें या फिर छोटे दलों के सहारे अल्पमत सरकार बनाएं।
इस चुनाव ने तमिलनाडु की पारंपरिक DMK और AIADMK की राजनीति को बड़ा झटका दिया है। कांग्रेस द्वारा पुराना गठबंधन छोड़कर TVK का साथ देना राजनीतिक हलकों में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। अगर आवश्यक समर्थन मिल जाता है तो चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में गुरुवार या शुक्रवार को विजय सरकार शपथ ले सकती है।