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ओडिशा के तीन प्रमुख बौद्ध स्थल अब यूनेस्को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल, बढ़ेगा धरोहर पर्यटन

ओडिशा के तीन प्रमुख बौद्ध स्थल को यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किया गया।

By प्रियंका कानू, Posted by: प्रियंका कानू

Jan 24, 2026 18:43 IST

भुवनेश्वर: ओडिशा सरकार ने शनिवार को राज्य के तीन प्रमुख बौद्ध स्थलों – रत्नागिरी, ललितगिरी और उदयगिरी को यूनेस्को की भारत की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल किए जाने पर खुशी जताई। इस कदम का उद्देश्य इन स्थलों को विश्व धरोहर स्थल के रूप में मान्यता दिलाना है।

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार, ओडिशा की उपमुख्यमंत्री और पर्यटन विभाग मंत्री प्रवाती परिदा ने कहा कि ये तीन बौद्ध स्थल प्राचीन ज्ञान से वैश्विक पहचान तक की यात्रा कर चुके हैं। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि रत्नागिरी, उदयगिरी और ललितगिरी को यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करना धरोहर, संरक्षण और सतत पर्यटन के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि ओडिशा का डायमंड ट्रायंगल- रत्नागिरी, ललितगिरी और उदयगिरी अब यूनेस्को की टेंटेटिव लिस्ट में शामिल हो गया है। यह हमारे राज्य, हमारी संस्कृति और धरोहर के लिए गर्व की बात है।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार, यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर के निदेशक लजारे एलौन्डो असोमो ने भारत के स्थायी प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा को लिखे पत्र में पुष्टि की कि भारत ने 22 दिसंबर 2025 को इन स्थलों का दस्तावेजीकरण प्रस्तुत किया। पत्र में कहा गया कि प्रस्ताव ऑपरेशनल गाइडलाइंस को पूरा करता है इसलिए यूनेस्को ने भारत की टेंटेटिव लिस्ट में इन सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थलों को शामिल किया। इतिहासकारों के अनुसार, इन स्थलों को बौद्ध सर्किट का 'डायमंड ट्रायंगल' कहा जाता है। माना जाता है कि यहां तीनों बौद्ध सम्प्रदाय – हीनायना, महायना और वज्रयान का प्रचार हुआ।

अधिकारियों ने बताया कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) ने संबंधित दस्तावेज तैयार कर यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज सेंटर को भारत के प्रतिनिधि विशाल वी शर्मा के माध्यम से सौंपा। ये तीन स्थल महायना और वज्रयान परंपराओं की समृद्ध विरासत को दर्शाते हैं और इनमें मठ, स्तूप, मूर्तियां और शिलालेख शामिल हैं, जो ओडिशा की एशिया में बौद्ध धर्म प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका को उजागर करते हैं। ऐतिहासिक और पर्यटन विशेषज्ञों का कहना है कि रत्नागिरी, उदयगिरी और ललितगिरी को टेंटेटिव लिस्ट में शामिल करने से इस क्षेत्र में धरोहर पर्यटन, अनुसंधान और संरक्षण प्रयासों को भी बढ़ावा मिलेगा।

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