गांधीनगर : खैर लकड़ी की तस्करी के मामले में जांच कर रही प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुजरात के पंचमहल जिले के गोधरा शहर में स्थित 14 अचल संपत्तियों को जब्त किया है। ED पहले से ही खैर लकड़ी की तस्करी के मामले में जांच कर रही है। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 11.3 करोड़ रुपये बताई गई है।
ED ने कहा कि ये कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है। इस मामले में मुख्य अभियुक्त मुस्ताक आदम तसिया और मोहम्मद ताहिर हुसैन हैं।
जांच के अनुसार अभियुक्त गुजरात के कई जिलों—तापी, सूरत, वलसाड, नवसारी, नर्मदा और अन्य इलाकों में स्थित वन्यजीव अभयारण्यों से बिना अनुमति खैर के पेड़ों की अवैध कटाई में शामिल थे। यह कटाई वन विभाग की अनुमति के बिना की जा रही थी।
खैर लकड़ी अकेशिया कैटेचू (Acacia catechu) पेड़ से मिलती है। यह लकड़ी मजबूत और टिकाऊ होती है और इसमें टैनिन की मात्रा अधिक होती है। इसका उपयोग पारंपरिक दवाओं, रंग बनाने और पान में इस्तेमाल होने वाले कत्था के निर्माण में किया जाता है।
ED के मुताबिक अवैध रूप से काटी गई खैर लकड़ी को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाकर बेचा गया। इससे न केवल बड़े पैमाने पर जंगलों का नुकसान हुआ,बल्कि वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास को भी गंभीर क्षति पहुंची।
एजेंसी ने बताया कि अभियुक्त अपने साथियों के साथ मिलकर लगातार खैर के पेड़ों की अवैध कटाई कर रहे थे और लकड़ी को ग्रे मार्केट में बेचते थे। इन गैरकानूनी गतिविधियों से सरकार को भारी आर्थिक नुकसान हुआ और करोड़ों रुपये की अवैध कमाई की गई।
जांच के बाद ED ने अभियुक्त जुड़ी करीब 11.3 करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान कर उन्हें अस्थायी रूप से जब्त कर लिया। जब्त की गई संपत्तियों में गोधरा जिले की 14 अचल संपत्तियां शामिल हैं।
यह मनी लॉन्ड्रिंग जांच साल 2024 में शुरू हुई थी, जब सूरत ज़िले के मंडवी साउथ रेंज के रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर ने वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के उल्लंघन में खैर लकड़ी की तस्करी को लेकर मामला दर्ज किया था।