नई दिल्ली : जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्रसंघ द्वारा आयोजित रिफरेंडम में 2,100 से अधिक छात्रों ने कुलपति संतिश्री ढुलीपुडी पंडित के इस्तीफे के पक्ष में वोट दिया। रिफरेंडम के परिणाम बुधवार को छात्रसंघ द्वारा जारी किए गए।
छात्रसंघ की अध्यक्ष आदिती मिश्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि रिफरेंडम में कुल 2,409 छात्रों ने अपना वोट डाला। इनमें से 2 हजार 181 छात्रों ने कुलपति के पद पर बने रहने के विरोध में वोट किया। छात्रों का मानना है कि कुलपति द्वारा की गई जातिवादी टिप्पणियों के कारण उन्हें इस्तीफा देना चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि 207 छात्रों ने कुलपति के बने रहने के पक्ष में वोट दिया और 21 वोट अमान्य पाए गए।
जेएनयू प्रशासन ने इस मामले पर पीटीआई के सवालों का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। छात्रसंघ ने यह भी घोषणा की कि अगले सप्ताह कुलपति की सार्वजनिक सुनवाई आयोजित की जाएगी। जिसमें सेवानिवृत्त न्यायाधीश, वकील, शिक्षाविद और सक्रिय नागरिक आमंत्रित किए जाएंगे।
अध्यक्ष अदिती मिश्रा ने कहा कि सार्वजनिक सुनवाई 16 और 17 मार्च को होगी, जिसमें हम कुलपति के भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों का चार्जशीट पेश करेंगे।
विश्वविद्यालय और छात्रसंघ कई विवादों को लेकर लंबे समय से आमने-सामने हैं। फरवरी की शुरुआत से ही परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी हैं, जब विश्वविद्यालय ने चार जेएनयूएसयू पदाधिकारियों और पूर्व अध्यक्ष नितीश कुमार को दो सेमेस्टर के लिए निलंबित कर दिया था।
निलंबन आदेश 21 नवंबर 2025 को डॉ बी आर अम्बेडकर केंद्रीय पुस्तकालय में हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में जारी किए गए थे। इसके बाद निलंबन रद्द करने की मांग को लेकर और विरोध प्रदर्शन हुए,छात्रों के समूहों के बीच झड़पें हुईं, और कुलपति द्वारा कथित जातिवादी टिप्पणियों ने छात्रों और शिक्षकों के बीच तीखी प्रतिक्रिया को जन्म दिया।
इसके बाद जेएनयूएसयू ने मंगलवार को विश्वविद्यालय के सभी स्कूलों में रिफरेंडम कराया। जिसमें छात्रों से पूछा गया कि कुलपति को उनके जातिवादी बयानों और प्रशासनिक भ्रष्टाचार को देखते हुए पद पर बने रहना चाहिए या नहीं।
छात्रसंघ ने बयान में कहा कि रिफरेंडम ने छात्र समुदाय की भावनात्मकता को स्पष्ट रूप से दर्शाया। जेएनयू के छात्रों ने लोकतांत्रिक तरीके से कुलपति की जवाबदेही और उनके इस्तीफे की मांग की है। जेएनयूएसयू शिक्षा मंत्रालय से आग्रह करता है कि वे छात्रों की लोकतांत्रिक आवाज को गंभीरता से लें।