पटना : बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद अब उनका दिल्ली जाना तय माना जा रहा है। 16 मार्च को राज्यसभा के लिए निर्वाचित होने के बाद उन्हें 30 मार्च तक बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़नी होगी। इसके साथ ही राज्य में नए मुख्यमंत्री के नेतृत्व में सरकार बनने की चर्चा तेज हो गई है।
इस फैसले पर पूर्व सांसद आनंद मोहन ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने से जदयू और भाजपा दोनों को नुकसान होगा। बिना नाम लिए उन्होंने केंद्रीय नेतृत्व पर भी निशाना साधा और इस सियासी बदलाव के पीछे गलत रणनीति बताई।
आनंद मोहन ने कहा कि पिछले चुनाव में जनता ने नीतीश कुमार के नाम पर भरोसा जताया था। ऐसे में उनका दिल्ली जाना लोगों की उम्मीदों को चोट पहुंचाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि इसका फायदा विपक्ष को मिल सकता है।
नए मुख्यमंत्री के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह फैसला शीर्ष नेतृत्व को करना है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जनता इस बदलाव से खुश नहीं है। लोगों में नाराजगी साफ दिख रही है।
निशांत कुमार की भूमिका पर आनंद मोहन ने कहा कि उन्हें पूरी जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। उन्होंने उपमुख्यमंत्री पद को “चुप मुख्यमंत्री” बताया और कहा कि आधे-अधूरे अधिकार देने से स्थिति नहीं सुधरेगी।
कुल मिलाकर, इस राजनीतिक बदलाव ने बिहार में नई बहस छेड़ दी है और आने वाले दिनों में इसका असर साफ दिख सकता है।