नई दिल्ली : आईपीएल के इतिहास में जो पहले कभी नहीं हुआ उसे कर दिखाया सनराइजर्स हैदराबाद के तेज गेंदबाज प्रफुल्ल हिंगे ने। उन्होंने मैच के पहले ही ओवर में तीन विकेट लेकर विरोधी टीम को शुरुआती झटका दिया और रातों-रात सुर्खियों में आ गए। लेकिन इस चमकदार प्रदर्शन के पीछे एक बेहद कठिन संघर्ष की कहानी छिपी है-चोट, निराशा और लगातार मेहनत से बना एक लंबा सफर।
चोट से टूटा करियर, फिर नई शुरुआत की उम्मीद
साल 2022 में प्रफुल्ल हिंगे गंभीर चोट की चपेट में आ गए थे। उन्हें स्ट्रेस फ्रैक्चर हुआ था और लंबे समय तक मैदान से दूर रहना पड़ा। उस दौर को याद करते हुए उन्होंने जियोस्टार पर दिए एक इंटरव्यू में कहा की मेरा पूरा स्ट्रेस फ्रैक्चर हो गया था। कुछ दिन मैं समझ ही नहीं पा रहा था कि क्या करूं। जिंदगी में अंधेरा छा गया था। मैं खेल नहीं सकता था, कहीं जा नहीं सकता था, ठीक से चल-फिर भी नहीं पाता था। बाद में मैंने सोचा कि इसे स्वीकार करके ठीक होने पर ध्यान देता हूँ।
वरुण एरॉन का साथ और आत्मविश्वास की वापसी
इस मुश्किल समय में उनके साथ खड़े रहे भारतीय पूर्व तेज गेंदबाज वरुण एरॉन। उन्होंने हिंगे को समझाया कि इस तरह की चोटें तेज गेंदबाजों के करियर का हिस्सा होती हैं। प्रफुल हिंगे ने बताया की वरुण एरॉन ने मुझे कहा था कि उन्हें भी कई बार ऐसी चोट लगी है समय के साथ सब ठीक हो जाता है। उन्होंने मुझे थोड़ा धीमे चलने और उस समय को समझने की सलाह दी। इससे मेरा आत्मविश्वास वापस आया।
एमआरएफ पेस अकादमी से बदली गेंदबाजी
चोट से उबरने के बाद प्रफुल्ल हिंगे ने अपने खेल पर फिर से कड़ी मेहनत शुरू की। एमआरएफ पेस अकादमी में उन्होंने अपनी तकनीक को सुधारने पर काम किया और अपनी कमजोरियों को समझा। इसके बाद ऑस्ट्रेलिया की कठिन परिस्थितियों में खेलकर उन्होंने अपनी गेंदबाजी को और निखारा।
हिंगे ने कहा की एमआरएफ अकादमी में अलग-अलग राज्यों के गेंदबाज़ों को देखकर मुझे समझ आया कि मैं कहाँ खड़ा हूँ और मुझे क्या सुधारना है। इससे मेरा आत्मविश्वास भी बढ़ा। ऑस्ट्रेलिया में अलग पिचों पर गेंदबाजी करके मैंने बहुत कुछ सीखा।
रेड-बॉल क्रिकेट में उनका रिकॉर्ड भी प्रभावशाली रहा-10 मैचों में 27 विकेट। उन्होंने माना कि इस अनुभव ने उन्हें आईपीएल के लिए तैयार किया। उनके अनुसार रेड-बॉल क्रिकेट ने मुझे धैर्य सिखाया। एक ही जगह बार-बार गेंद डालना सीखा। नई गेंद से बल्लेबाज को परखने की योजना यहीं काम आई।
सपना अभी भी वही है
अचानक मिली सफलता के बावजूद प्रफुल्ल हिंगे अपने लक्ष्य से नहीं भटके हैं। उन्होंने कहा की लक्ष्य ट्रॉफी जीतना है लेकिन हम एक-एक मैच पर ध्यान दे रहे हैं। हर मैच में अच्छा प्रदर्शन करना और टीम की मदद करना ही असली मकसद है।
बचपन में टेनिस बॉल से खेल शुरू करने वाले इस खिलाड़ी का सपना अब भारतीय टीम तक पहुंचना है। उन्होंने कहा की मुझे नहीं लगता कि बहुत कुछ बदला है। यह तो बस शुरुआत है। मैं वैसे ही रहना चाहता हूँ जैसा पहले था। शोहरत आती-जाती है लेकिन मेहनत ही असली चीज है।