मुंबई : भारत की तीसरी टी-20 विश्व कप जीत में स्टार ऑलराउंडर शिवम दुबे की बड़ी भूमिका रही। भले ही उनकी पारियां छोटी रहीं लेकिन उन्होंने कई अहम मौकों पर शानदार कैमियो खेलकर भारत को जीत दिलाई। सही समय पर रन गति बढ़ाने का काम उन्होंने किया और फाइनल में भी ऐसा ही हुआ लेकिन वही विश्व कप विजेता खिलाड़ी जब घर लौटे तो उन्हें ट्रेन के एक सामान्य एसी कोच में सफर करना पड़ा! और इस ट्रेन यात्रा के दौरान उन्हें कई चुनौतियों का सामना भी करना पड़ा। इनमें कंबल के नीचे छिपना और टिकट चेकर की नजरों से बचना जैसी घटनाएं भी शामिल थीं लेकिन बाकी खिलाड़ियों की तरह दुबे फ्लाइट से क्यों नहीं लौटे? उन्होंने खुद यह कहानी बताई।
सोमवार को अहमदाबाद से मुंबई लौटने के लिए शिवम दुबे, उनकी पत्नी अंजुम और एक दोस्त को कोई विमान नहीं मिला। मजबूर होकर उन्होंने ट्रेन से लौटने का फैसला किया। टिकट पाने में ज्यादा दिक्कत नहीं हुई। अहमदाबाद-मुंबई सायाजी एक्सप्रेस के एसी थ्री-टियर कोच में उनकी बुकिंग हो गई लेकिन इससे समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई। अगर कोई दुबे को पहचान लेता तो? विश्व कप जीत को लेकर देशवासियों में अभी भी उत्साह है। इसलिए चुपचाप लौटने के अलावा उनके पास कोई विकल्प नहीं था। तब दुबे ने क्या किया?
एक साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि हम कार से भी लौट सकते थे लेकिन उसमें बहुत ज्यादा समय लगता। इसलिए ट्रेन से लौटने का फैसला किया। मजबूरी में मुझे भेष बदलना पड़ा। मैंने फुल स्लीव टी-शर्ट, एक टोपी और मास्क पहन लिया था। ट्रेन छूटने से पांच मिनट पहले तक हम स्टेशन के बाहर कार में इंतजार कर रहे थे। फिर दौड़ते हुए ट्रेन में चढ़े। उसके बाद तुरंत ऊपर वाली बर्थ पर चला गया और भूरे रंग के कंबल से सिर से पांव तक खुद को ढक लिया।
फिर भी परेशानी खत्म नहीं हुई। टिकट परीक्षक ने आकर पूछा कि शिवम दुबे? वह कौन है? क्या कोई क्रिकेटर है? इस पर तुरंत अंजुम ने कहा कि नहीं-नहीं, वह यहां कैसे आएंगे? हालांकि ट्रेन से लौटने में दुबे को कोई दिक्कत नहीं हुई। आठ घंटे की यात्रा का ज्यादातर समय उन्होंने सोते हुए बिताया।
लेकिन उन्हें चिंता थी कि बोरीवली स्टेशन पर उतरते समय लोग उन्हें पहचान सकते हैं। इसलिए आखिरकार उन्होंने पुलिस की मदद ली और कड़ी सुरक्षा के बीच अपने घर पहुंचे। दुबे की इस ट्रेन यात्रा की कहानी अब क्रिकेट प्रेमियों के बीच काफी चर्चा का विषय बन गई है।