नई दिल्ली : भारत के अनुभवी स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से अचानक संन्यास लेने को लेकर चल रही अटकलों के बीच अपनी चुप्पी तोड़ी। खबरें थीं कि मुख्य कोच गौतम गंभीर ने उन्हें यह फैसला लेने के लिए मजबूर किया। अश्विन ने 2024-25 सीजन की बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी के दौरान ही संन्यास की घोषणा की थी। गाबा में तीसरा टेस्ट ड्र होने के बाद वह भारत लौट आए थे उस समय सीरीज 1-1 की बराबरी पर थी।
इस अचानक फैसले से क्रिकेट जगत में हलचल मच गई थी क्योंकि तब भी सीरीज के दो मैच बाकी थे। उल्लेखनीय है कि पहले टेस्ट में उनकी जगह वॉशिंगटन सुंदर को मौका मिला था। दूसरे टेस्ट में अश्विन टीम में लौटे लेकिन तीसरे टेस्ट में उन्हें फिर बाहर बैठना पड़ा जिस पर काफी आलोचना हुई।
गंभीर से कोई नाराजगी नहीं
हालांकि अश्विन ने साफ किया कि कोच गौतम गंभीर के प्रति उनके मन में कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर कोच को लगता है कि सीनियर खिलाड़ियों जैसे कि विराट कोहली या रोहित शर्मा को हटना चाहिए तो यह टीम के हित में ही होगा। अश्विन ने कहा कि कोच का काम टीम को आगे बढ़ाना है। अगर उन्हें लगता है कि टीम में अब मेरी जगह नहीं है तो इसे स्वीकार करना ही सही है।
अहंकार छोड़ना सीखा है
अश्विन ने आगे कहा कि उन्होंने हमेशा अपने अहंकार को त्यागने की कोशिश की है। उनके अनुसार, हम सभी इंसान हैं और अहंकार स्वाभाविक है लेकिन दूर से देखने पर समझ आता है कि हर फैसले के पीछे एक कारण होता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि भारत में अत्यधिक प्रशंसा कई बार खिलाड़ियों को खुद को अजेय समझने पर मजबूर कर देती है जो वास्तविकता नहीं है।
मैं लटके रहने वालों में नहीं
अश्विन ने कहा कि उन्हें बार-बार रविंद्र जडेजा और वॉशिंगटन सुंदर के साथ रोटेशन में खिलाया जा रहा था जिससे उन्हें संकेत मिल गया कि वह टीम की भविष्य की योजनाओं का हिस्सा नहीं हैं। उन्होंने कहा कि मैं अपने फैसले खुद लेना पसंद करता हूं। जब मुझे लगा कि समय खत्म हो गया है तब मैंने हटने का निर्णय लिया। मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो टीम में वापसी की उम्मीद में लटके रहते हैं।