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कोलकाता में मतदान के दौरान EVM पर उठा सवाल, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने धीमी प्रक्रिया का लगाया आरोप

दूसरे चरण की वोटिंग में 142 सीटों पर मुकाबला तेज, TMC–BJP में बयानबाजी चरम पर।

By श्वेता सिंह

Apr 29, 2026 11:37 IST

कोलकाताः पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण में मतदान के बीच तकनीकी गड़बड़ी का मुद्दा सामने आने से सियासी पारा चढ़ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की उम्मीदवार चंद्रिमा भट्टाचार्य (Chandrima Bhattacharya) ने कोलकाता के एक मतदान केंद्र पर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) में खराबी का आरोप लगाया है।

दमदम उत्तर सीट से चुनाव लड़ रहीं चंद्रिमा भट्टाचार्य ने दक्षिण कोलकाता के आर्य विद्यालय स्थित बूथ संख्या 126 पर वोट डालने के बाद कहा कि मशीन में आई गड़बड़ी के कारण मतदान की रफ्तार धीमी हो गई। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपना वोट जरूर डाला, लेकिन तकनीकी दिक्कतों की वजह से मतदाताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

चंद्रिमा भट्टाचार्य इस सीट से दो बार विधायक रह चुकी हैं और पिछली बार उन्होंने भाजपा उम्मीदवार को बड़े अंतर से हराया था। इस बार उनके सामने भाजपा के सौरभ सिकदर और माकपा की दीप्सिता धर की चुनौती है, जिससे मुकाबला दिलचस्प हो गया है।

दूसरी ओर, इस मुद्दे के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य (Keshav Prasad Maurya) ने दावा किया कि पश्चिम बंगाल में भाजपा की जीत तय है और राज्य से “माफिया राज” खत्म होने वाला है। वहीं, ब्रजेश पाठक (Brajesh Pathak) ने मतदाताओं से बड़ी संख्या में वोट डालने की अपील करते हुए कहा कि जनता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों पर भरोसा जता रही है।

यह चरण खास तौर पर अहम माना जा रहा है क्योंकि मतदान तृणमूल कांग्रेस (TMC) के पारंपरिक गढ़-दक्षिण बंगाल और कोलकाता में हो रहा है। कुल 294 सीटों में से 142 सीटों पर वोट डाले जा रहे हैं। इस चरण में करीब 3.21 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का इस्तेमाल कर रहे हैं।

चुनाव में 1,448 उम्मीदवार मैदान में हैं, जिनमें 220 महिला उम्मीदवार भी शामिल हैं। 41,000 से अधिक मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें से 8,000 से ज्यादा केंद्र पूरी तरह महिला कर्मियों द्वारा संचालित किए जा रहे हैं।

2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस ने इस क्षेत्र में जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए 142 में से 123 सीटों पर जीत हासिल की थी। इस बार भाजपा शहरी मतदाताओं और खास समुदायों में अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है, जबकि TMC अपने वर्चस्व को कायम रखने के लिए मैदान में डटी है।

मतगणना 4 मई को होगी, जिसके बाद यह साफ हो जाएगा कि पश्चिम बंगाल की सत्ता पर किसका कब्जा होगा।

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