नयी दिल्लीः राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ की तरह ही राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम्’ गाते समय भी खड़े होकर सम्मान देना होगा। राष्ट्रीय गीत के प्रोटोकॉल में बदलाव कर इस विचार को जोड़ने पर केंद्र का गृह मंत्रालय विचार कर रहा है। ‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की रचना को विशेष महत्व देने की सोच गृह मंत्रालय की है। हालांकि इस विषय में अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
जानकारी के अनुसार ‘वंदे मातरम्’ को अतिरिक्त महत्व देने के लिए केंद्र तत्पर है। गृह मंत्रालय राष्ट्रीय गान की तरह ही ‘वंदे मातरम्’ के गायन के मामले में कुछ अतिरिक्त नियम लागू करना चाहता है इस विषय पर मोदी सरकार के भीतर चर्चा हुई है, लेकिन अभी तक कुछ भी अंतिम नहीं हुआ है। वर्तमान में ‘वंदे मातरम्’ गाते समय किसी विशेष नियम का पालन नहीं करना होता। भाजपा सरकार की प्रारंभिक योजना के अनुसार यदि यह लागू होता है तो इस गीत के प्रदर्शन के समय भी खड़ा होना होगा और अनिवार्य रूप से भाग लेना होगा। वर्तमान कानून के अनुसार यदि कोई राष्ट्रीय गान का अपमान करता है तो उसे तीन वर्ष तक कारावास की सजा हो सकती है। ‘वंदे मातरम्’ के मामले में भी वैसा ही नियम लागू करने की सोच है।
उल्लेखनीय है कि 1950 में संविधान अंगीकार किए जाने वाले वर्ष में ही ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गीत का दर्जा दिया गया था।
‘वंदे मातरम्’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में सम्मान प्रदर्शित करने के लिए शीतकालीन सत्र में मोदी सरकार ने एक विशेष सत्र का भी आयोजन किया था। हालांकि उसी सत्र में भाषण देते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अनजाने में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय को ‘बंकिम दा’ कहकर संबोधित कर दिया। इसके विरोध में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों ने विरोध प्रदर्शन किया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का दावा है कि विवाद और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच केंद्र सरकार साहित्य सम्राट बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय की ‘वंदे मातरम्’ को नए रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। उसी के अनुसार इस वर्ष कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस की परेड में थीम गीत ‘वंदे मातरम्’ था। बंगाल विधानसभा चुनाव निकट हैं। भगवा खेमे की पार्टी उससे पहले एक बंगाली मनीषी की रचना को विशेष महत्व देकर बंगाली भावनाओं के सहारे वोट बैंक मजबूत करना चाहती है।