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अब हफ्ते में दो दिन पूरी तरह वर्चुअल होगी सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लिया यह फैसला?

जजों को कार-पूलिंग की सलाह, कोर्ट स्टाफ को सीमित वर्क फ्रॉम होम की अनुमति।

By श्वेता सिंह

May 15, 2026 22:55 IST

नई दिल्लीः सुप्रीम कोर्ट ने वैश्विक ऊर्जा संकट और ईंधन बचत को ध्यान में रखते हुए कामकाज के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। केंद्र सरकार की ईंधन संरक्षण संबंधी सलाह के बाद शीर्ष अदालत ने फैसला किया है कि फिलहाल सप्ताह में कम-से-कम दो दिन अदालत की कार्यवाही पूरी तरह वर्चुअल मोड में संचालित की जाएगी।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा शुक्रवार को जारी एक सर्कुलर में कहा गया है कि सोमवार, शुक्रवार और अन्य ‘मिसलेनियस डे’ के रूप में घोषित दिनों में सूचीबद्ध मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा आंशिक कार्य दिवसों में भी मामलों की सुनवाई वर्चुअल माध्यम से की जाएगी।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश

सर्कुलर में सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री को निर्देश दिया गया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय पर भेजे जाएं और तकनीकी सुविधाएं सुचारु रखी जाएं, ताकि सुनवाई के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो।

रजिस्ट्री को यह भी कहा गया है कि अदालत, वकीलों और पक्षकारों को समय पर तकनीकी सहायता उपलब्ध कराई जाए।

जजों के लिए कार-पूलिंग व्यवस्था

ईंधन की खपत कम करने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीशों ने आपसी सहमति से कार-पूलिंग को बढ़ावा देने का निर्णय लिया है। सर्कुलर के मुताबिक, जज वाहन साझा कर यात्रा करेंगे ताकि ईंधन का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

कोर्ट स्टाफ को वर्क फ्रॉम होम की सुविधा

सुप्रीम कोर्ट प्रशासन ने रजिस्ट्री स्टाफ को भी आंशिक राहत दी है। प्रत्येक शाखा या सेक्शन के अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों को सप्ताह में दो दिन तक रोटेशन के आधार पर घर से काम करने की अनुमति दी गई है।

हालांकि यह स्पष्ट किया गया है कि अदालत का काम प्रभावित नहीं होना चाहिए और सभी कर्मचारियों को फोन पर उपलब्ध रहना होगा। जरूरत पड़ने पर उन्हें तत्काल कार्यालय भी बुलाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि किसी शाखा में वर्क फ्रॉम होम व्यवस्था प्रभावी नहीं पाई जाती है, तो संबंधित रजिस्ट्रार उस व्यवस्था में बदलाव या उसे सीमित कर सकते हैं।

पश्चिम एशिया संकट का असर

यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी और ईंधन संरक्षण की जरूरत को देखते हुए केंद्र सरकार विभिन्न संस्थानों को खपत कम करने के उपाय अपनाने की सलाह दे रही है।

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