नई दिल्ली: लद्दाख को नेपाल या बांग्लादेश की राह पर ले जाने की कोशिश कर रहे थे सोनम वांगचुक। सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख के क्लाइमेट एक्टिविस्ट के खिलाफ केंद्र सरकार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। सोनम वांगचुक को 26 सितंबर 2025 से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून यानी एनएसए के तहत हिरासत में रखा गया है। केंद्र के इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। सोमवार को न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति प्रशन्ना बी वराले की डिवीजन बेंच में इस मामले की सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अदालत में साफ तौर पर कहा कि सोनम वांगचुक के बयान और गतिविधियां राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हैं। केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दावा किया कि वांगचुक अपने बयानों के जरिए लद्दाख के युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहे थे। उनका उद्देश्य लद्दाख की स्थिति को नेपाल या बांग्लादेश जैसी बनाना था और हिंसा व राजनीतिक अस्थिरता फैलाना था।
संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत मिले संवैधानिक उपचार के अधिकार का हवाला देते हुए सोनम वांगचुक ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि इस मामले में एनएसए का इस्तेमाल पूरी तरह अनुचित है। उनका तर्क है कि लद्दाख के पर्यावरण, स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल उठाना देशद्रोह नहीं हो सकता। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक विरोध की आवाज को दबाने की कोशिश बताया। हालांकि सुनवाई की शुरुआत में ही पीठ ने स्पष्ट किया कि अनुच्छेद 32 के तहत सोनम की हिरासत के आदेश को सीधे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। अदालत के अनुसार, असली सवाल यह है कि जिन कारणों, तर्कों और दस्तावेजों के आधार पर हिरासत का आदेश जारी किया गया है, उनका राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई वास्तविक और प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं।
इसके बाद तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में यह महत्वपूर्ण नहीं है कि अदालत संतुष्ट हो या नहीं बल्कि यह देखा जाना चाहिए कि सोनम वांगचुक की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था बाधित होने की आशंका को देखते हुए क्या जिला मजिस्ट्रेट ने तर्कसंगत रूप से यह निर्णय लिया था। हिरासत आदेश का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि वांगचुक के विभिन्न भाषणों और बयानों से युवा समाज के हानिकारक गतिविधियों की ओर प्रेरित होने की आशंका जताई गई थी। प्रशासन का मानना था कि इससे सामाजिक शांति भंग हो सकती है। तुषार मेहता ने यह भी दावा किया कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करते हुए मात्र चार घंटे के भीतर हिरासत आदेश जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि देश की अखंडता और संप्रभुता के खिलाफ किसी को भी जहर फैलाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार दोपहर 2 बजे होगी। इस प्रकरण को लेकर पहले ही राजनीतिक और नागरिक हलकों में तीखी बहस शुरू हो चुकी है। राष्ट्रीय सुरक्षा बनाम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के इस संवैधानिक टकराव में अब पूरे देश की नजरें सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी हैं।