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'जो देश आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, उनसे अच्छे पड़ोसी जैसा व्यवहार होने की उम्मीद नहीं की जा सकतीः' एस जयशंकर

आईआईटी मद्रास में जयशंकर ने भारत की विदेश नीति का दृष्टिकोण स्पष्ट किया। बुरे पड़ोसी को स्पष्ट संदेश दिया। कहा-ऐसे देश पानी जैसे समझौतों से फायदा लेने का दावा भी नहीं कर सकते।

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 02, 2026 19:12 IST

चेन्नईः विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को चेन्नई में भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में आयोजित ग्लोबल रिसर्च फाउंडेशन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आयोजित एक अनौपचारिक बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि भारत की विदेश नीति आम समझ पर आधारित है। अगर कोई पड़ोसी देश भारत के साथ अच्छा व्यवहार करता है तो भारत भी उसकी मदद करता है, सहयोग करता है और संसाधन साझा करता है। लेकिन अगर कोई पड़ोसी देश भारत को नुकसान पहुंचाता है, खासकर आतंकवाद फैलाता है तो भारत को अपने नागरिकों की रक्षा करने का पूरा अधिकार है।

उन्होंने कहा कि कूटनीति को अक्सर बहुत जटिल बताया जाता है, जबकि असल में यह सामान्य समझ की बात है। जैसे रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हम अच्छे पड़ोसियों से दोस्ती रखते हैं और बुरे पड़ोसियों से सावधान रहते हैं, वैसे ही देशों के रिश्ते भी होते हैं। भारत ने हमेशा अच्छे पड़ोसियों के साथ उदार और सहयोगी रवैया अपनाया है।

जयशंकर ने उदाहरण देते हुए बताया कि कोविड-19 महामारी के समय भारत ने कई देशों को टीके उपलब्ध कराए। यूक्रेन युद्ध के दौरान कई देशों को ईंधन और भोजन की सहायता दी गई। जब श्रीलंका गंभीर आर्थिक संकट में फंसा तब भारत ने उसे लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर की मदद दी।यह सब भारत ने इसलिए किया क्योंकि वह अच्छे पड़ोसी की जिम्मेदारी निभाता है।

उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जो देश सालों तक आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, उनसे अच्छे पड़ोसी जैसे रिश्तों की उम्मीद नहीं की जा सकती। ऐसे देशों को पानी जैसे समझौतों का लाभ भी नहीं मांगना चाहिए। उनका कहना था कि आप यह नहीं कह सकते कि मेरे साथ आतंकवाद भी जारी रहेगा और मैं आपसे मदद भी चाहता हूं।

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि भारत दूसरे देशों से साफ, स्पष्ट और ईमानदार संवाद करता है ताकि उसकी नीयत को गलत न समझा जाए। संवाद से विश्वास बनता है और दुनिया भारत की बात को गंभीरता से लेती है। उन्होंने भारत की सभ्यता और लोकतंत्र पर गर्व जताते हुए कहा कि भारत दुनिया की उन बहुत कम प्राचीन सभ्यताओं में से एक है, जो आज भी एक आधुनिक राष्ट्र के रूप में मौजूद हैं। भारत ने लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनी मर्जी से अपनाया और इसी वजह से लोकतंत्र आज एक वैश्विक विचार बन सका। पश्चिमी देशों के साथ भारत की साझेदारी भारत के लिए महत्वपूर्ण है।

अरुणाचल प्रदेश से जुड़ी एक हालिया घटना का जिक्र करते हुए जयशंकर ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है और हमेशा रहेगा। किसी भी तरह के दबाव या चाल से जमीनी सच्चाई नहीं बदलेगी। भारत अपने लोगों और अपनी सुरक्षा की रक्षा पूरी मजबूती से करेगा।

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