भोपालः लगातार आठवीं बार भारत का ‘सबसे स्वच्छ शहर’ का दर्जा पाने वाला इंदौर आज गंभीर संकट से जूझ रहा है। मध्य प्रदेश के इस शहर में दूषित पानी पीने से कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई है, जबकि डायरिया और उल्टी जैसे लक्षणों के साथ 1,100 से अधिक लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में ‘आपात स्थिति’ बन गई है। सवाल यह है कि इलाके का पानी आखिर कैसे ज़हरीला हो गया?
जांच में प्रशासन की चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है। बताया गया कि इलाके में एक पुलिस आउटपोस्ट के पास एक शौचालय बनाया गया था, जो सीधे पीने के पानी की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर स्थित था। हैरानी की बात यह है कि शौचालय के नीचे कोई सेप्टिक टैंक भी नहीं बनाया गया था। इसके चलते पाइपलाइन में रिसाव हुआ और शौचालय का कचरा सीधे पीने के पानी में मिल गया। वही पानी पीने से हजारों निवासी बीमार पड़ गए।
इंदौर नगर निगम के आयुक्त दिलीप कुमार ने बताया कि सेप्टिक टैंक का निर्माण अनिवार्य होता है। उन्होंने कहा कि मुख्य पाइपलाइन में एक छेद पाया गया है और ठीक उसके ऊपर शौचालय बनाए जाने के कारण कचरा पीने के पानी में मिल गया। उन्होंने यह भी बताया कि जलापूर्ति की मुख्य पाइपलाइन के ऊपर ऐसे कई अन्य चैम्बर भी चिन्हित किए गए हैं, जिन्हें हटाया जा रहा है। इस मामले में किसी और तरह की लापरवाही या चूक हुई है या नहीं, इसकी जांच जारी है।
स्थिति को संभालने के लिए मोहन यादव स्वयं सक्रिय हुए हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख रुपये मुआवजा देने और बीमार लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। मामले में जिम्मेदार इंजीनियर और जोनल अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। वहीं मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भी स्वतः संज्ञान लेते हुए 24 घंटे के भीतर रिपोर्ट तलब की है।
भारत के सबसे स्वच्छ शहर में हुई इस अभूतपूर्व घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है।