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ऑपरेशन सिंदूर: 2025 की सबसे अहम सैन्य-रणनीतिक कार्रवाई, भारत की आतंकवाद-रोधी नीति को दिया नया सिद्धांत

रक्षा और कूटनीतिक विशेषज्ञों की साझा राय में ऑपरेशन सिंदूर को 2025 की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य-रणनीतिक कार्रवाई इसलिए माना जा रहा है क्योंकि इसने भारत की आतंकवाद-रोधी नीति को एक स्थायी, स्पष्ट और सख्त सिद्धांत में बदल दिया। यह केवल एक सैन्य अभियान नहीं था, बल्कि नए भारत की सुरक्षा नीति की औपचारिक घोषणा थी,जहां कार्रवाई और निर्णायक प्रतिरोध प्राथमिकता

By डॉ. अभिज्ञात

Jan 01, 2026 13:10 IST

नयी दिल्लीः साल 2025 को भारत के सैन्य और रणनीतिक इतिहास में एक निर्णायक वर्ष के रूप में देखा जा रहा है। इस वर्ष भारत ने न केवल अपनी सैन्य और तकनीकी क्षमता का प्रदर्शन किया, बल्कि सीमा-पार आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति को एक स्पष्ट, सख्त और पूर्वानुमेय सिद्धांत के रूप में स्थापित किया। इस बदलाव का केंद्र बिंदु रहा ऑपरेशन सिंदूर, जिसे रक्षा विशेषज्ञ 2025 की सबसे महत्वपूर्ण सैन्य-रणनीतिक कार्रवाई मान रहे हैं।

पहलगाम आतंकी हमला और भारत की जवाबी कार्रवाई

पहलगाम में हुए भीषण आतंकी हमले के बाद भारत ने 7 मई को ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-अधिकृत जम्मू-कश्मीर में मौजूद आतंकी ढांचे पर सटीक सैन्य प्रहार किए। इसके बाद पाकिस्तान द्वारा किसी भी प्रकार की सैन्य बढ़त की कोशिश को भारत ने प्रभावी ढंग से नाकाम किया, जिससे इस्लामाबाद को युद्धविराम की ओर बढ़ना पड़ा। रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह कार्रवाई केवल प्रतिशोध नहीं थी, बल्कि यह एक सुविचारित रणनीतिक संदेश था कि सीमा-पार आतंकवाद को अब केवल कूटनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि युद्ध का कृत्य माना जाएगा।

वायु रक्षा और आधुनिक युद्ध का बदला स्वरूपः कंवलजीत सिंह ढिल्लों

जम्मू-कश्मीर और पूर्वोत्तर में काउंटर-इंसर्जेंसी और काउंटर-टेररिज़्म अभियानों में आठ कार्यकाल पूरे कर चुके लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) कंवलजीत सिंह ढिल्लों ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर ने यह साफ कर दिया कि आज का भारत पहले जैसा नहीं रहा। उनके अनुसार, “पाकिस्तान ने यह गणना ही नहीं की कि आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, एक मजबूत सैन्य शक्ति है और उसके पास स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति है। पहलगाम हमला पाकिस्तान की आंतरिक विफलताओं से ध्यान भटकाने की कोशिश थी।”

उन्होंने यह भी कहा कि यदि पाकिस्तान भविष्य में फिर किसी आतंकी कार्रवाई को अंजाम देता है, तो “ऑपरेशन सिंदूर 2.0” सैन्य के साथ-साथ आर्थिक, राजनीतिक और कूटनीतिक स्तर पर भी कहीं अधिक कठोर होगा।

लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने ऑपरेशन सिंदूर में वायु रक्षा की भूमिका को आधुनिक युद्ध की “तलवार-भुजा” बताया। उनके अनुसार, इस अभियान में भारत की एयर डिफेंस प्रणालियों ने दुश्मन के रडार, ड्रोन, मिसाइलों और उन्नत हवाई प्लेटफॉर्म्स को निष्क्रिय किया। भविष्य का युद्ध पारंपरिक खाई-युद्ध या सीमाओं को पार करने वाला नहीं होगा, बल्कि वह वायु रक्षा, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर, साइबर और अंतरिक्ष आधारित होगा—एक ऐसा युद्ध जिसमें प्रत्यक्ष संपर्क नहीं होगा।

21वीं सदी का सबसे तीव्र भारत-पाक संघर्ष, आतंकवाद पर नई नीति: अजय बिसारिया

पाकिस्तान में भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने ऑपरेशन सिंदूर को 21वीं सदी का सबसे तीव्र भारत-पाक सैन्य टकराव बताया। उन्होंने कहा कि यह भारत की पिछली आतंक-रोधी प्रतिक्रियाओं से गुणात्मक रूप से अलग था। उनके अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर एक फुल-स्पेक्ट्रम, हाई-टेक आक्रामक और रक्षात्मक मिशन था, जिसमें ड्रोन, लोइटरिंग म्यूनिशन, इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और लेयर्ड एयर डिफेंस का एकीकृत उपयोग किया गया। यह अभियान भारतीय वायुसेना की एकीकृत वायु कमान एवं नियंत्रण प्रणाली (IACCS) के माध्यम से संचालित हुआ।

अजय बिसारिया ने कहा कि इस ऑपरेशन के जरिए भारत ने साफ कर दिया है कि सीमा-पार आतंकवाद को अब केवल कूटनीतिक विरोध या पुलिस कार्रवाई के दायरे में नहीं रखा जाएगा। हर प्रमाणित आतंकी हमले को युद्ध का कृत्य मानते हुए उसका काइनेटिक सैन्य जवाब दिया जाएगा।

उनके अनुसार, भारत अब “रणनीतिक संयम” की नीति से आगे बढ़कर डॉक्ट्रिनल डिटरेंस की अवस्था में पहुंच चुका है, जहां जवाब न केवल तय है, बल्कि पूर्वानुमेय और विश्वसनीय भी है।

प्रधानमंत्री के संदेश से नीति को राजनीतिक वैधता

विशेषज्ञों का कहना है कि पहलगाम हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सार्वजनिक रूप से आतंकवादी हमले को सैन्य प्रतिक्रिया से जोड़ना इस नई नीति का स्पष्ट राजनीतिक संकेत था। इससे यह संदेश गया कि आतंकवाद के अब ठोस और प्रत्यक्ष परिणाम होंगे।

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