नई दिल्ली: लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक बड़े कदम के तहत भारत सरकार ने काउंटर पर बिकने वाली खांसी की सिरप की बिक्री के लिए सख्त मानदंडों से जुड़े संशोधनों का प्रस्ताव किया है।
केंद्र सरकार ने ड्रग्स रूल्स-1945 में एक महत्वपूर्ण संशोधन का मसौदा जारी किया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने शेड्यूल-K से ‘सिरप’ शब्द हटाने का प्रस्ताव रखा है। यह कदम दवाओं से जुड़े नियमों को अधिक स्पष्ट और प्रभावी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है ताकि जनहित की रक्षा हो सके। इस पर जनता से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने कुछ नियमों में संशोधन के लिए यह मसौदा अधिसूचना जारी की है और जनता से आपत्तियां व सुझाव आमंत्रित किए हैं। यह मसौदा ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940 के तहत जारी किया गया है। प्रस्तावित बदलाव ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड से परामर्श के बाद सार्वजनिक किए गए हैं।
अधिसूचना में आगे कहा गया है कि जिन लोगों पर इन नियमों का प्रभाव पड़ सकता है, उनकी जानकारी के लिए यह मसौदा प्रकाशित किया जा रहा है। राजपत्र की प्रतियां सार्वजनिक होने की तिथि से 30 दिनों की अवधि समाप्त होने के बाद इन नियमों पर विचार किया जाएगा। इस अवधि में प्राप्त सभी आपत्तियों और सुझावों पर केंद्र सरकार विचार करेगी।
हाल ही में, अक्टूबर 2025 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी एक चेतावनी जारी की थी। यह चेतावनी तमिलनाडु स्थित Sresan Pharmaceuticals द्वारा निर्मित Coldrif कफ सिरप से जुड़े बच्चों की कई मौतों और गंभीर दुष्प्रभावों के बाद जारी की गई थी।
सर गंगाराम अस्पताल में मेडिसिन विभाग के चेयरपर्सन डॉ. अतुल काकर ने कहा, “हाल ही में ‘सिरप’ शब्द वाली कई कफ सिरप पर सरकार ने प्रतिबंध लगाया है। अक्टूबर में राजस्थान और मध्य प्रदेश में बच्चों की कई मौतें सामने आईं, क्योंकि इन सिरप में कुछ विषैले तत्व थे। मेरा मानना है कि दवाएं केमिस्ट द्वारा खुद से नहीं दी जानी चाहिए और दवाओं का अत्यधिक वितरण नहीं होना चाहिए। केवल सिरप तक सीमित न रहते हुए अन्य दवाओं के मामले में भी सख्ती होनी चाहिए।”
वहीं फोर्टिस अस्पताल शालीमार बाग में बाल रोग विभाग के सीनियर डायरेक्टर एवं यूनिट हेड डॉ. विवेक जैन ने कहा, “ओटीसी छूट सूची से सिरप को हटाना अत्यंत आवश्यक कदम है। तरल दवाएं बच्चों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती हैं, लेकिन इनका सबसे अधिक दुरुपयोग भी होता है। अक्सर बिना सही खुराक, उम्र के अनुसार संकेत या चिकित्सकीय निगरानी के। सिरप को केवल पर्चे पर उपलब्ध कराने से स्वयं-उपचार पर रोक लगेगी, खुराक संबंधी गलतियों से बचाव होगा और एंटीबायोटिक्स, कफ सप्रेसेंट्स व स्टेरॉइड्स के अनावश्यक उपयोग में कमी आएगी।