घर में किसी को बुखार या शरीर में दर्द हो तो कई लोग डॉक्टर की सलाह लिए बिना जो दवा मुंह में रख लेते हैं, वह है ‘निमेसुलाइड’ (Nimesulide)। लोकप्रिय ब्रांड नामों में शामिल हैं ‘निसिप’ (Nicip), ‘निमुलिड’ और ‘निमुपेन’। यह दवा लंबे समय से भारतीय घरों में इस्तेमाल हो रही है लेकिन अब आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने 100 मिलीग्राम से अधिक मात्रा वाली सभी ओरल निमेसुलाइड दवाओं को प्रतिबंधित कर दिया है।
29 दिसंबर को जारी निर्देश में कहा गया कि 100 मिलीग्राम से अधिक निमेसुलाइड का निर्माण, बिक्री और वितरण पूरी तरह अवैध होगा। यह निर्णय इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) की सिफारिश के अनुसार लिया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, उच्च मात्रा में यह दवा लेने से लीवर को गंभीर नुकसान हो सकता है और कई मामलों में यह जानलेवा भी हो सकता है। विशेष रूप से बुजुर्ग और 18 वर्ष से कम उम्र के बच्चों पर इसके दुष्प्रभाव गंभीर हो सकते हैं।
सिर्फ मनुष्यों के लिए ही नहीं बल्कि हमारे पर्यावरण पर भी इस दवा का बुरा असर पड़ा है। इसी साल जनवरी में इसे पशु चिकित्सा में भी प्रतिबंधित किया गया था। कारण यह था कि यह दवा गाय और अन्य पशुओं के इलाज में इस्तेमाल होने पर गिद्धों की मौत का प्रमुख कारण बन गई थी, जिससे पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा था।
अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा और जापान जैसे विकसित देशों में यह दवा पहले से ही प्रतिबंधित है। भारत में भी 2011 में 12 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए यह दवा प्रतिबंधित कर दी गई थी। अब बड़े लोगों की सुरक्षा के लिए भी इस पर रोक लगाई गई है। चिकित्सकों के अनुसार, बाजार में इस दवा की तुलना में कई सुरक्षित विकल्प उपलब्ध हैं इसलिए हल्की खांसी या दर्द में स्वयं दवा लेने से बचें और डॉक्टर की सलाह अवश्य लें।