नई दिल्लीः कांग्रेस नेताओं राशिद अल्वी और वी. हनुमंत राव ने गुरुवार को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत की हालिया टिप्पणियों को लेकर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन पर और भाजपा पर विभाजनकारी एजेंडा आगे बढ़ाने, हिंदी थोपने और भारत के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को कमजोर करने की कोशिश करने का आरोप लगाया।
एएनआई कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भागवत के बयान ज़मीन पर कार्रवाई में तब्दील नहीं होते। उन्होंने महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने के प्रयासों के प्रति भी चेतावनी दी।
कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने कहा कि आरएसएस प्रमुख और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी-दोनों ही वास्तविक समस्याओं के समाधान के बजाय अपनी छवि गढ़ने पर ध्यान दे रहे हैं। अल्वी ने कहा, “मोहन भागवत और प्रधानमंत्री-दोनों अपनी-अपनी छवि बनाने में लगे हैं। उन्हें इस बात की परवाह नहीं दिखती कि वे जो कहते हैं, वह ज़मीन पर लागू भी होता है या नहीं। अगर मोहन भागवत सच में ऐसा मानते हैं तो वे भाजपा नेताओं से क्यों नहीं कहते कि दक्षिण भारत के लोगों पर जबरन हिंदी थोपना बंद करें? इससे वहां भारी विरोध होता है और लोग हिंदी से नफरत करने लगते हैं। मोहन भागवत के बयान से कोई फर्क नहीं पड़ेगा। उन्हें यह बात अपने कैडर और भाजपा नेताओं को समझानी चाहिए।”
कांग्रेस नेता वी. हनुमंत राव ने भी आरएसएस प्रमुख पर भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाने और महात्मा गांधी की विरासत को मिटाने की दिशा में काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “आरएसएस प्रमुख भागवत का केवल एक ही काम है-भारत को ‘हिंदू राष्ट्र’ बनाना और इसमें से महात्मा गांधी का नाम मिटाना। लोगों को इसे समझना चाहिए और इसे रोकने की कोशिश करनी चाहिए। यह देश हिंदू देश नहीं बन सकता क्योंकि यह एक धर्मनिरपेक्ष देश है। वे महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) से भी महात्मा गांधी का नाम हटाकर उसमें भगवान राम का नाम जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। लोगों को इसके खिलाफ लड़कर इसे पलट देना चाहिए।”
उल्लेखनीय है कि रविवार को मोहन भागवत ने कहा था कि भारत को एक बार फिर ‘विश्वगुरु’ बनने की दिशा में काम करना चाहिए। यह किसी महत्वाकांक्षा के कारण नहीं, बल्कि दुनिया की आवश्यकता है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अब सनातन धर्म के पुनर्जागरण को आगे बढ़ाने का समय आ गया है। हैदराबाद में एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने लगभग एक सदी पहले की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि करीब 100 साल पहले योगी अरविंद ने घोषणा की थी कि सनातन धर्म का पुनरुत्थान ईश्वर की इच्छा है और इसके लिए हिंदू राष्ट्र का उदय आवश्यक है। उन्होंने कहा, “वह समय अब आ गया है।”
भागवत ने आगे कहा कि भारत या हिंदू राष्ट्र सनातन धर्म और हिंदुत्व एक-दूसरे के पर्याय हैं। ‘विश्वगुरु’ बनने के लिए विभिन्न क्षेत्रों में निरंतर और कठोर परिश्रम की आवश्यकता है, जिसमें संघ के प्रयास भी शामिल हैं।