पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान अपनी ताकत दिखाई। जब पश्चिम बंगाल में भाजपा की अगुवाई कर रहे थे तब विधानसभा में भाजपा विधायकों की संख्या 77 तक पहुंच गई थी। उसके बाद दिलीप घोष धीरे-धीरे राजनीति के मैदान से दूर होते चले गए। पिछले 8-9 महीनों से वे पार्टी के किसी कार्यक्रमों में भी नहीं दिख रहे थे।
आखिरकार नए साल के पहले दिन एक बार फिर से वह अपने पुराने अवतार में नजर आएं। 31 दिसंबर को सॉल्टलेक में अमित शाह के साथ उनकी बंद कमरे में एक छोटी सी बैठक हुई।
सूत्रों का दावा है कि विधानसभा चुनाव 2026 में पार्टी उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी सौंपने वाली है। इस बैठक के बाद दिलीप घोष एक बार फिर से अपने पुराने अवतार में नजर आएं। नए साल के पहले दिन यानी 1 जनवरी को दिलीप घोष ने पार्टी ऑफिस में संवाददाताओं को संबोधित किया।
पूर्व सांसद और भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष ने क्या कहा?
अमित शाह ने क्या कहा?
‘मुझे कल बुलाया गया था। चुनाव की तैयारियों को लेकर बैठक थी। उन्होंने कहा कि मुझे काम पर लगना है। हमने पार्टी के संगठन पर चर्चा की। मैं पूछा कि वह मुझसे क्या चाहते हैं। कोई खास जिम्मेदारी नहीं दी गई। मुझे नहीं पता कि क्या जिम्मेदारी सौंपी जाएगी... मैंने कहा कि मैं पूरे समय हूं। पार्टी जैसा कहेगी मैं वैसा काम करूंगा... पार्टी को जब मेरी जरूरत होगी मैं तब वहां हूं।’
क्या दिलीप घोष तृणमूल में शामिल होंगे?
‘कुछ और नया सोचकर कहें, मैं और क्या ही कहूं?’
क्या खड़गपुर से चुनाव लड़ेंगे?
‘यह पार्टी तय करेगी। अगर पार्टी को लगता है कि मेरे चुनाव लड़ने से पार्टी को फायदा होगा तो मैं जरूर चुनाव लड़ूंगा।’
क्या पार्टी में पुराने और नए लोगों के बीच कोई बैर है?
‘पार्टी चलती रहेगी, लोग आएंगे और कुछ चले जाएंगे। जब कोई नया व्यक्ति आता है तो उसे इस पार्टी की संस्कृति सीखनी पड़ती है...’ दिलीप घोष ने यह भी कहा, ‘पुराना और नया जैसी कोई चीज नहीं होती। मैं 10 साल पहले आया था कुछ 12 साल पहले आए थे। कुछ और भी पहले आए थे। जो नए हैं उनकी जिम्मेदारी है कि वे पार्टी से जुड़ें और खुद को भाजपा का सदस्य साबित करें। कई लोगों ने ऐसा किया भी है।’
क्या पार्टी के नए सदस्य दिलीप घोष को नहीं समझ पा रहे हैं?
‘इसमें झगड़े जैसी कोई बात मुझे नहीं लगती। पार्टी मुझे समझे उतना ही होगा। कौन समझ रहा है और कौन नहीं, यह समझाना मेरी जिम्मेदारी नहीं है।’
पहले जिन पार्टी कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था उनसे क्या कहेंगे?
‘पार्टी कार्यकर्ताओं ने मेरे खिलाफ विरोध नहीं किया। कई लोग बाहर से आए और विरोध किया। वे अपनी पुरानी आदतें नहीं छोड़ पाए। वे भूल जाते हैं कि कब किसे काला झंडा दिखाना है।’